लॉकडाउन : गर्भवती महिला अपने पति के साथ 100 किमी. पैदल चलने को हुई मजबूर...!!

कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने प्रवासी मजदूरों की परेशानियां बढ़ा दी है और लोग अपने घरों के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं। इसी दौरान आठ महीने की गर्भवती महिला व उसका पति भूखे-प्यासे अपने घर पहुंचने के लिए 100 किलोमीटर पैदल यात्रा करने को मजबूर हुए क्योंकी लॉकडाउन के बाद उसके मालिक ने उन्हें आर्थिक मदद देने से इंकार कर दिया। सहारनपुर से बुलंदशहर के लिए पैदल यात्रा करने के बीच जब वे मेरठ पहुंचे तो स्थानिय लोगों ने उनकी आर्थिक मदद की और एंबुलेंस बुलाई ताकि वे आगे की यात्रा पुरी कर सकें।
स्थानिय नवीन कमाल व रविंदर साव ने दंपत्ति यास्मिन और वकील को जब मेरठ के शोराब बस स्टैंड पर देखा तो उन्होंने दंपत्ति की मदद की और नौचंदी स्पेंक्टर प्रेमपाल को समस्या से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह दंपत्ति 100 किमी पैदल चलकर यहां पहुंचे हैं। ढाबे बंद होने के कारण उन्होंने दो दिनों से खाना भी नहीं खाया। नौचंदी पुलिस स्टेशन इंचार्ज आशुतोष ने बताया कि स्थानिय लोगों ने इस दंपत्ति को खाना खिलाया व कुछ नकदी दी। उनके लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की गई ताकि उन्हें बुलंदशहर के आम्रगढ़ गांव तक पहुंचाया जा सके। 

वकील ने बताया है कि वह एक फैक्ट्री में काम करता था व 100 किमी की यात्रा करके पत्नी संग मेरठ तक पहुंचा है। वहीं महिला जस्मिन ने बताया कि पति एक फैक्ट्री में काम करता है और मालिक द्वारा उपलब्ध कराए गए एक कमरे में रहते थे। लॉकडाउन के बाद फैक्ट्री मालिक ने कहा कि कमरा खाली कर दो और अपने घर चले जाओ। यहां तक की उसने धनराशि देने से भी इंकार कर दिया। कोई विकल्प न मिलने पर हमने पैदल ही अपने गांव की ओर कूच कर दिया।
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