लॉकडाउन : "साहब, 100 रुपये भी नहीं हैं, सुखी रोटी खा रहे हैं" एक बेबस बाप!

भिण्ड. सहकारी संस्था प्रतापपुरा के गोदाम पर चौकीदार का काम करने वाले अल्पसंख्यक को पिछले 12 माह से वेतन न मिलने और लॉकडाउन के चलते काम धंधा बंद हो जाने से भूखों मरने की कगार पर पहुंचा दिया है। मौजूदा हालात ये है कि घर में कैद इस परिवार को उबले हुए आलू खाकर अपने परिवार का पेट भरना पड़ रहा है।
प्रतापपुरा निवासी इमरान खान के परिवार में पत्नी समेत चार सदस्य हैं। दिन में इमरान घर के बाहर छोटी दुकान चलाता था और रात में सहकारी संस्था की एक गोदाम में 3000 हजार रुपए मासिक के वेतन पर चौकीदारी का काम करता था। लॉकडाउन के चलते दुकान 10 दिनों से बंद है। सहकारी संस्था ने पिछले 12 माह से वेतन नहीं दिया है। इमरान की एक विकलांग बेटी जोया खान है जिसके उपचार पर प्रतिदिन 100 रुपए का खर्चा है।

जमा राशि खत्म हो जाने से मासूम का उपचार भी बंद है। प्रतापपुरा में पदस्थ सेल्समैन शिवकुमार शर्मा द्वारा कमीशन का हिसाब नहीं देने से इमरान का भुगतान नहीं हो पा रहा है। बैंक मैनेजर ने सैल्समेन को हटाने का नोटिस भी दिया है। सहकारी संस्था के अध्यक्ष प्रदीप बरुआ, सरपंच सियाराम शर्मा, जगदीश बरुआ ने चौकीदार के वेतन का भुगतान करने के लिए सीएम तथा कलेक्टर को लिखा है। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज करा दी गई है।

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