16 साल की उम्र में बुढ़ापा, छोटे बच्चों को ही क्यों हो जाती है ये बीमारी, जानिए...

किसी बच्चे के लिए वक़्त की रफ़्तार अगर कई गुना बढ़ जाये और बचपन में ही बुढ़ापा उसे जकड़ ले, तो न सिर्फ उस बच्चे पर बल्कि उसके करीबियों पर भी क्या बीतती होगी ये अनुमान भी लगाना मुश्किल है। दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम प्रोजेरिया रोग के बारे में बात करेंगे जिसमें कम उम्र के बच्चों में बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगते है, तो चलिए जानते है इस बिमारी के बारे में -
प्रोजेरिया रोग एक ऐसा रोग है जिसमें कम उम्र के बच्चों में बुढ़ापे जैसे लक्षण दिखने लगते है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे आमतौर पर 17 साल से ज्यादा नहीं जी पाते है। ये अत्यंत दुर्लभ बीमारी है। अगर आपने 'पा' फिल्म देखी होगी तो आप जानते होंगे जिसमें अमिताभ बच्चन प्रोजेरिया रोग से ग्रसित एक बच्चे का रोल किया था।
ये बिमारी 'पा' फिल्म के बाद लोगों के चर्चा में आई थी इससे पहले शायद ही कोई इस बिमारी को जनता होगा। ये बिमारी कई प्रकार की होती है। प्रोजेरिया को सैपिड एजिंग या हचिनसन गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम या हचिंगसन- गिल्फोर्ड सिंड्रोम भी कहते हैं। 1886 में डॉ. जोनाथन हचिनसन और 1897 में डॉ. हटिंग्स डिलफोर्ड ने इस बीमारी की खोज की थी। इसी कारण इसे 'हचिनसन- गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम' के नाम से भी जाना जाता है।
प्रोजेरिन नाम के एक प्रोटीन से प्रोजेरिया की बीमारी होती है। यह बीमारी जीन्स और कोशिकाओं में उत्परिवर्तन की स्थिति के चलते होती है। इस रोग का कारण डॉक्टर्स हॉर्मोन्स की गड़बड़ी को मानते हैं लेकिन नवीनतम शोध में इसके लिए लैमिन-ए जींस को ज़िम्मेदार ठहराया गया है। इस बीमारी से ग्रसित 90 फ़ीसदी बच्चों में इसका कारण लैमिन-ए नामक जीन में आकस्मिक बदलाव को माना गया है। यह गड़बड़ी अचानक ही हो जाती है। अभी तक दुनियाभर के 53 बच्चों में इस बिमारी के लक्षण पाए गए है और इसके ठीक होने की संभावना लगभग 1 प्रतिशत है।
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