"सर 19 टन तरबूज खराब हो रहे हैं, मेरे पापा मर जाएंगे"

‘प्रशासन के हेल्पलाइन नम्बर पर कॉल कर रहीं हूं, कोई उठा नहीं रहा। मेरे पापा हार्ट के मरीज है। मंडी में फलों का कारोबार करते हैं। 19 टन तरबूज कई दिन से मंडी में पड़ा हुआ है। उनका काफी पैसा फंसा है। खराब हो गया तो मेरे पिता नहीं रहेंगे।’
यह गुहार साहबगंज निवासी विजयलक्ष्मी की है। उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ को फोन कर बताया कि उनके पिता 60 वर्षीय रामकेश गुप्ता महेवा फल मंडी में फल की बिक्री का कमीशन पर काम करते हैं। उन्होंने 19 टन तरबूज बिक्री के लिए मंगाया था लेकिन लॉकडाउन के कारण 21 मार्च को आए फल की न तो छंटाई हो सकी न ही बिक्री। 

इसी तनाव में उनकी तबीयत भी खराब हो गई है। विजयलक्ष्मी ने कहा कि प्रशासन उनके फलों का वितरण भी लोगों के बीच करा देता तो कम से पिता को उनकी लागत मिल जाती। एक ओर जहां मंडी में मजदूर नहीं हैं वहीं हुमायूंंपुर में रहने वाले रामकेश मंडी पहुंच भी नहीं पा रहे हैं।
Loading...