75 लाख रुपये की मिठाइयां खा गया कोरोना, जानिए पूरी खबर...

लॉकडाउन ने महानगर समेत जिले के मिठाई विक्रेताओं और बेकरी संचालकों को लाखों का नुकसान उठाने को मजबूर कर दिया। दुकानें बंद रहने से करीब 75 लाख रुपये की मिठाइयां और पांच लाख रुपये के केक-पेस्ट्री खराब होने से खाने लायक नहीं बचे। जिले मेें ऐसे लगभग 150 मिठाई विक्रेता हैं, जिनका सालाना कारोबार 12 लाख रुपये और इससे अधिक का है। बड़े पैमाने पर मिठाइयां तैयार करने वाले इन दुकानदारों को खाद्य सुरक्षा विभाग ने लाइसेंस भी जारी किए हैं। 
इनके अतिरिक्त करीब 800 से अधिक ऐसे मिठाई विक्रेता हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 12 लाख रुपये से कम है। इसी तरह करीब 10-12 बेकरी शॉप हैं जो रोजाना लगभग 30 से 40 हजार रुपये के केक, पेस्ट्री, पेटीज आदि तैयार करते हैं। मिठाई विक्रेताओं ने लॉकडाउन से पहले तमाम मिठाइयां बनाई थीं। महानगर के प्रमुख मिठाई विक्रेता सत्य प्रकाश आर्य के अनुसार एक सप्ताह की बिक्री के लिए करीब 50 हजार रुपये की मिठाइयां तैयार कराई थीं, लेकिन अगले दिन से लॉकडाउन लागू हो गया। 

उनका कहना है कि लॉकडाउन की घोषणा होने पर दुकान में रखीं तमाम मिठाइयां मित्रों-परिचितों में बांट दीं। ऐसा करके उन्होंने मिठाइयां खराब होने से बचा लीं, लेकिन कारोबारी नुकसान हो ही गया। जो मिठाई विक्रेता अपना माल सहेजे रहे, उनकी मिठाइयां भी बर्बाद हो गई और नुकसान हुआ सो अलग। गोविंदगंज स्थित प्रमुख बेकरी शॉप संचालक राम चांदना के अनुसार उन्हें भी पहले दिन माल खराब होने से करीब 50 हजार रुपये का घाटा सहना पड़ा और बाद मेें आर्डर लेने बंद कर दिए।
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