अपने नेत्रहीन बेटी को लेकर दिल्ली से 800 किलोमीटर दूर अपने गांव पैदल ही निकल गए सिकंदर शर्मा

केंद्र और दिल्ली सरकार के तमाम आश्वासनों के बावजूद दिल्ली से गरीब तबके का पलायन रुक नहीं रहा है। कोरोना वायरस की वजह से देशभर में 21 दिन के लिए लॉकडाउन लागू है और इसकी वजह से पूरे देश सहित दिल्ली में भी तमाम व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगी हुई है। पूर्वी दिल्ली में बाहरी राज्यों से आए दिहाड़ी मजदूर भारी संख्या में रहते हैं, कुछ अपने परिवार के साथ तो कुछ अकेले। लेकिन, लॉकडाउ की वजह से सभी की दिहाड़ी बंद हो गई है।
ऐसे ही दिहाड़ी मजदूरों में से एक सिकंदर शर्मा हैं जो अपनी नेत्रहीन बेटी के साथ उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर से आकर दिल्ली में रह रहे थे। लेकिन लॉकडाउन की वजह से उनकी रोज कमाई का जरिया खत्म हो चुका है। हालात जल्द नहीं सुधरने की आशंका जान सिकंदर शर्मा अपनी बेटी को साथ लेकर पैदल ही अपने गांव सिद्धार्थ नगर के लिए निकल गए। उन्होंने बताया कि अभी हालात पता नहीं कब सुधरेंगे और यहीं रहे तो खाने पीने के लाले पड़ सकते हैं, ऐसे में समय रहते अपने गांव निकल रहे हैं। 
सिकंदर शर्मा ने बताया कि उनका गांव दिल्ली से लगभग 800 किलोमीटर दूर है और फिलहाल वे पैदल चल रहे हैं लेकिन उनको उम्मीद है कि आगे बस मिल जाएगी। हालांकि, सिकंदर शर्मा ने यह भी बताया कि वे अपनी बेटी के साथ अकेले नहीं जा रहे हैं बल्कि उनके साथ गांव के और लोग भी हैं, लेकिन बेटी नेत्रहीन है ऐसे में परेशानी ज्यादा हो रही है। देशभर में सिकंदर शर्मा जैसे हजारों लोग होंगे जिन्हें इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा होगा।
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