परिवार ने 8 घंटे तक शव को नहीं लगाया हाथ, जानिए ऐसा क्या था कारण...

कोरोना के कारण कहीं न कहीं रिश्तों में जहां मजबूती आने लगी है, वहीं अब किसी न किसी परिवार में अपनों के लिए दूरियां भी आने लगी हैं। यह उस परिवार के लिए बदनसीबी भी हो सकती है। ताजा मामला माछीवाड़ा के नजदीक पड़ते गांव चक्की का है। खांसी-जुकाम से पीड़ित यहां के एक व्यक्ति की मौत हो गई। अब परिवार और गांव वाले कोरोना से मौत के शक में उसके पास भी नहीं आ रहे थे। बाद में सेहत विभाग ने भरोसा दिया कि मृत युवक में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है तो पीड़ित परिवार ने शाम को उसका गांव के श्मशानघाट में अंतिम संस्कार किया। परिवार के अनुसार, 45 वर्षीय यह व्यक्ति आनंदपुर साहिब में होला महल्ला में गया था। 
वह 11 मार्च को वहां से लौटा था। पिछले करीब पांच-छह दिन से उसे खांसी, जुकाम और सांस लेने की समस्या हो गई थी। वह पास ही के एक डॉक्टर से दवा लेता रहा। वह पारिवारिक सदस्यों से अलग घर में रहता था। रविवार सुबह करीब आठ बजे परिवार के लोग उसे देखने गए तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। उस व्यक्ति की मौत के बाद परिवार और गांव वासी भी सहम गए। उन्हें लगा कि वह आनंदपुर साहिब से होकर आया था। इस कारण उसमें कोरोना वायरस के लक्षण हो सकते हैं। इस कारण गांव वालों ने तो दूर, परिवार के लोगों ने भी उसके शव को हाथ नहीं लगाया। फिर उन्होंने तुरंत सेहत विभाग को सूचित किया। 

पंचायत की तरफ से इस व्यक्ति की मौत की सूचना देने पर सेहत विभाग और प्रशासन की टीम पहुंची। टीम ने दूर से ही लाश का मुआयना कर गांव वासियों से कह दिया कि उसकी मौत कोरोना वायरस से नहीं हुई, इसलिए उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाए। मगर कुछ ही समय बाद पंचायत ने फैसला किया कि जब तक मृत व्यक्ति का कोरोना वायरस का टेस्ट नहीं हो जाता, वे शव को हाथ नहीं लगाएंगे। 

दोपहर में फिर गांव वासियों ने पुलिस और सेहत विभाग को दोबारा सूचित किया। साथ ही कहा कि जब तक मृतक और उसके पारिवारिक सदस्यों का टेस्ट नहीं लिया जाता, वह शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। फिर सेहत विभाग की टीम गांव चक्की पहुंची और शव का मुआयना करने में जुट गई। टीम वे गांव वासियों को विश्वास दिलाया कि यह मौत कोरोना वायरस से नहीं हुई। इस पर पूरी सावधानी के साथ टीम की निगरानी में शाम करीब चार बजे शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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