"कोई बताएगा...आखिर हमारा क्या कसूर है, हम तो पापा से कुछ मांगते भी नहीं थे" बेटे की चाहत और..!!

बेटे की चाहत में छह बेटियां हो गईं। परिवार बड़ा होता चला गया। खर्चे बढ़ गए। लेकिन लखन की बेटे की चाहत खत्म नहीं हुई। पति-पत्नी में इसे लेकर विवाद होने लगा। बताया जा रहा है कि लखन मानसिक रूप से भी कमजोर हो गया था। यह झगड़ा यहां तक पहुंच जाएगा कोई नहीं जानता था। लखन के गुस्से ने छह बेटियों के सिर से मां-बाप का साया उठा दिया। बेटियों का कहना था कि वह अपने पापा से कुछ मांगते भी नहीं थे, लेकिन फिर भी वह मम्मी से झगड़ा करते रहते थे।
बड़ी बेटी तेरह साल की मुस्कान है जबकि उससे छोटी अमृता, आयुषी, अनन्या, शिवन्या और एक साल की शिवांगी है। बड़ी बेटी प्राइमरी में कक्षा पांच में पढ़ती है जबकि छोटी आंगनबाड़ी केंद्र में जाती हैं। अगर खिलारा गांव के लोगों की मानें तो लखन पहले ऐसा नहीं था। जो छोटी-मोटी खेती है उसे तो करता ही था मजदूरी भी कर लिया करता था लेकिन पिछले कुछ समय से वह परेशान था। आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी। छह बेटियों के साथ परिवार में आठ सदस्य थे। 

एसपी देहात राहुल मिठास का कहना है कि वह गुस्सैल हो गया था। ग्वालियर के किसी अस्पताल में उसका इलाज भी चल रहा था। पति-पत्नी के बीच आए दिन विवाद भी होता था। अब जितना बड़ा परिवार था उस हिसाब से उसकी आमदनी भी नहीं थी। वहीं दंपती की मौत से परिवार में कोहराम है। हर किसी की जुबां पर बस एक ही सवाल था कि इन बच्चियों का क्या कसूर था। अब दादा ही इनका लालन-पालन करेंगे।
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