आखिर कौन सा खज़ाना है ग्रीनलैंड देश में, जिसको अमेरिका पाने कि उम्मीद लगाए बैठा हुआ है!

अमेरिका ग्रीनलैंड क्यों खरीदना चाहता है? एक ऐसा द्वीप, जिसका 80 फीसदी हिस्सा ग्लेशियरों से ढंका है और जहां 60 हज़ार से भी कम लोग रहते हैं, इस पर अमेरिका की नज़र क्यों गड़ी हुई है? ये एक जायज़ सवाल है, जिसका जवाब अब तक ट्रंप ने नहीं दिया है। आइए जानें कि आखिर क्यों अमेरिका की निगाहें इस द्वीप पर गड़ी हुई हैं।
सबसे पहली बात तो यही है कि ग्रीनलैंड के बारे में विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां अपार प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। लौह अयस्क, सीसा, ज़िंक, हीरा, सोना और यूरेनियम व तेल जैसे दुनिया के दुर्लभ तत्वों के इस द्वीप पर होने की भरपूर संभावनाएं जताई जा चुकी हैं। दूसरी बात ये है कि इस द्वीप की प्राकृतिक संपदा अब तक अछूती है। 

नासा ने इसी साल यह पाया था कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ग्रीनलैंड के इतिहास में ग्लेशियर पिघलने की दो सबसे बड़ी घटनाएं हुईं। ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते बर्फ पिघलती है, तो यहां खनिजों व प्राकृतिक तत्वों का खनन आसान भी हो सकता है। अब अगर ग्रीनलैंड बिकता है तो इसकी कीमत 1.3 अरब डॉलर के करीब बैठती है। दूसरी बात है कि तब अमेरिका ने यह रकम सोने के रूप में देने की पेशकश की थी।
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