लॉकडाउन : खाने के लिए भी नहीं थे पैसे इसलिए मजबूरी में पैदल निकल पड़े घर से!

लॉकडाउन की घोषणा होने के साथ ही बड़े शहरों में कारखाने बंद हो गए, खाने पीने का सामान भी महंगा हो गया। ट्रेन, बस और यातायात के अन्य साधन भी बंद हो गए। परिवार के पेट भरने के फिराक में ऐसे हजारों परिवार बड़े शहरों से पैदल ही अपने घरों के लिए निकल पड़े। नेशनल हाईवे -2 पर जालौन जिले के सिरसा थाना क्षेत्र के रायपुर मड़ैया गांव निवासी रामकरण पुत्र पांच साथियों के साथ जयपुर से पैदल आ रहे थे। उन्होंने बताया कि जयपुर में पोताई का काम करते हैं। 24 मार्च की रात में वे पैदल निकल पडे़। रास्ते में सड़क किनारे किसी ढाबे या अन्य जगह सो जाते हैं। पुलिस परेशान कर रही है। 
उत्तर प्रदेश की सीमा में आने के बाद समाजसेवियों के जरिये खाना मिलने लगा है। बताया कि रात तक घर पहुंच जाएंगे। औरैया निवासी दीपू गुड़गांव से लौट रहे थे। दीपू ने बताया कि रेडीमेड कपड़ा बनानेे के कारखाने में काम करता था। लॉकडाउन होते ही कंपनी बंद हो गई, इस पर मालिक ने निकाल दिया। इस पर अकेला ही घर के लिए चल दिया। लिफ्ट लेकर और पैदल यहां तक पहुंचे हैं। कानपुर देहात जिले के कुछ लोग नोएडा से जुगाड़ गाड़ी पर जाते दिखे। एक गाड़ी में छह से अधिक लोग सवार थे। ये लोग 25 मार्च को निकले थे।

राजस्थान के जयपुर से कई परिवार कन्नौज के हसेरन और तिर्वा आदि नगरों के लिए ऊसराहार होते हुए निकले। पैदल जा रहे पुष्पेंद्र, सर्वेश, सुभाष, राजेश, शिवम, मनोज सुधीर ने बताया कि 24 मार्च की रात में निकले थे। महिलाएं साथ में होने से बहुत डर लग रहा है। एक परिवार औरैया के दिबियापुर जा रहा था। उनके साथ भी महिलाएं और बच्चे थे। ये परिवार तीन दिन पहले दिल्ली से चला था। एसडीएम ताखा नंद प्रकाश मौर्य का कहना था कि पैदल जा रहे लोगों, बेसहारा और गरीबों को भोजन कराने के लिए ग्राम प्रधानों और राजस्व कर्मचारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। ऊसराहार क्षेत्र से निकले रहे सैंकड़ों परिवारों को कालिका माता सुंदर कांड सेवा समिति के लोगों ने नमकीन, बिस्कुट और पानी की बोतले उपलब्ध कराईं।
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