कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया ने कोहराम मचा रखा है। हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। यहां तक की दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका की भी हालत खराब हो रही है। अमेरिका कोरोना संक्रमण के मामले में चीन से आगे निकल गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे में अमेरिका में 16,000 लोग कोरोना की चपेट में आ गए हैं और वहां कुल आंकड़ा 85,000 के पार पहुंच चुका है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देख कर हर कोई डरा हुआ है। लेकिन एक ऐसा देश भी है,जो कोरोना को अपने हर नागरिकों में फैलाना चाहता है। दरअसल, ये देश ब्रिटेन है। 
एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां कि सरकार कोरोना वायरस के असर को घटाने के लिए इसे पूरी आबादी में फैलना चाहती है ताकि लोगों में 'हर्ड इम्युनिटी' यानी सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए। और कोरोना को खत्म किया जा सके। ब्रिटेन के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वैलेंस ने ये सलाह सरकार को दी है। इस प्रक्रिया को हर्ड इम्यूनिटी कहते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट के सामने आने बाद ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कहा गया की इसके बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता मैट हैनकॉक ने बताया महामारी के फैलने के साथ ही अपने आप हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है।

क्या है हर्ड इम्युनिटी? 

हर्ड इम्यूनिटी मेडिकल साइंस का एक बहुत पुरानी प्रक्रिया है। इसके तहत देश की 60% से अधिक आबादी को वायरस से संक्रमित करना होता है। जिससे उनका शरीर इस वायरस से लड़ने के लिए इम्यून हो जाए। और भविष्य में कभी इस वायरस संक्रमण उनमें ना फैले। हर्ड इम्यूनिटी की प्रक्रिया लागू होने के बाद पूरे देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कोरोना संक्रमण से मुक्त हो जाता। वायरस के फैलाव को रोकने में मदद मिलती। हर्ड इम्यूनिटी को समझने के लिए सबसे अच्छा उदाहरण पोलियो है। ये बीमारी जब आई तो पूरी दुनिया डर गई लेकिन अब दुनिया की लगभग पूरी आबादी पोलियो से इम्यून हो चुकी है।
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