कोरोना से “जंग” से डरकर भागा बिहार का अधिकारी, कहा, "जो करना है कर लीजिए" और फिर जो हुआ जानिये...

पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। देश में हर कोई अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से इस महामारी के खिलाफ हर संभव मदद के लिए आगे आ रहा है, लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर के श्रम अधीक्षक ने कोरोना के खिलाफ लड़ने से मना कर दिया। कोरोना वायरस से लड़ने का श्रम अधीक्षक मुज़फ़्फ़रपुर यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जो करना है, कीजिये। हालांकि इसके बाद जिलाधिकारी मुज़फ़्फ़रपुर डॉक्टर चंद्रशेखर सिंह ने दिए श्रम अधीक्षक के खिलाफ एफआईआर करने के आदेश दे दिया है। मुजफ्फरपुर डीएम ने श्रम अधीक्षक विनय कुमार के विरुद्ध एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 के सेक्शन 2,3 एवं 4 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। 
श्रम अधीक्षक विनय कुमार पर डीएम ने गंभीर आरोप लगाकर केस दर्ज करने का ऑर्डर जारी कर दिया है। आरोप है कि श्रम अधीक्षक विनय कुमार बैठक में उपस्थित नहीं हुए। श्रम अधीक्षक को तत्काल जिला मुख्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया, लेकिन उनके द्वारा स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि मैं मुख्यालय में नहीं उपस्थित हो सकता हूं और जो कार्रवाई करना है कर लीजिए। श्रम अधीक्षक के द्वारा अत्यंत ही अमर्यादित तरीके से व्यवहार किया गया जो एक सरकारी कर्मी के लिए निर्धारित आचरण एवं व्यवहार के सर्वथा प्रतिकूल है। 

डीएम ने अपने पत्र में लिखा है कि लॉक डाउन की तिथि 23 मार्च से ही वे पटना में हैं जबकि इस कार्यालय के आदेश में उनकी प्रतिनियुक्ति सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर में गठित नियंत्रण कक्ष में की गई थी। उनके द्वारा अवकाश अथवा मुख्यालय से बाहर आने संबंधी कोई अनुरोध भी नहीं किया गया था। इस आकस्मिक परिस्थिति में भी बिना अनुमति के अनाधिकृत रूप से अवकाश पर और मुख्यालय से बाहर हैं यह अत्यंत गंभीर मामला है। इसलिए उनके खिलाफ अनुशासनहीनता स्वच्छता एवं वरीय पदाधिकारियों के विरुद्ध अमर्यादित व्यवहार का मामला बनता है।
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