लॉकडाउन : "अंकल जी! और कितनी देर बाद मिलेगा खाना, रात से भूखे हैं हम"

भूख क्या होती है। ये तो हम सभी जानते हैं। लेकिन भूख लगने पर अगर खाना न मिले तो क्या बीतती है, इसका अंदाजा शायद हर किसी को नहीं होता। और जब दो, तीन साल के बच्चों को भी भूख के लिए तरसना पड़े तो उनपर क्या बीतती होगी। कैसे भूखे रहकर रात-दिन गुजारे होंगे। दो माह पूर्व पति को छोड़कर जाने के बाद भीख मांगकर अपना गुजारा करने वाली महिला के सामने शहर में लॉकडाउन के चलते बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। 
गरीबों को भोजन कराने और योजनाओं का लाभ देने के दावे करने वाले शासन-प्रशासन का भी इन बच्चों पर कोई ध्यान नहीं है। बिहार के पटना निवासी महिला सरिता को उसका पति दो माह पूर्व छोड़कर चला गया था। सरिता अपनी चार साल की बेटी पूजा,एक साल की बेटी अर्चना और छह माह के बेटे कार्तिक को लेकर शामली के रेलवे स्टेशन के आसपास रह रही थी। वह सुबह से शाम तक भीख मांगकर अपने बच्चों का गुजारा कर रही थी। 

लेकिन देश में फैल रहे कोरोना वायरस के चलते शामली में लॉकडाउन चल रहा है। अब इस महिला के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। अपने बच्चों की भूखा देख यह महिला बच्चों को लेकर शामली शहर की सड़कों पर निकल गई। जब महिला शामली के बुढ़ाना रोड स्थित प्रभुजी की रसोई में पहुंची तो वहां खाना बनता देखा। महिला के साथ में उसकी बच्ची ने जब खाना देखा तो उससे रुका नही गया। और खाना बनाने वाले सेवादार से बोली की अंकल जी और कितने देर बाद खाना मिलेगा,रात से कुछ नही खाया है। 

ना ही छोटे भाई बहन को कुछ खाने को मिला है। वहां के सेवादारों ने कहा कि चिता मत करो। खाना बन रहा है। फिर करीब एक घंटा इंतजार करने के बाद खाना तैयार हुआ तो सबसे पहले इन्हें ही खिलाया गया। सेवादारों ने छोटे बच्चे के लिए दूध की भी व्यवस्था की। उधर, शासन-प्रशासन लाउडस्पीकर से शहर में यह दावे करा रहा है कि कोई भी भूखा नहीं रहेगा सभी को प्रशासन की और से खाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
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