एक घंटे में मिल गया दूसरा दूल्हा, राहत शिविर में हुई शादी, जानिए पूरा मामला...

हिंसा की वजह से बन्ने खां का घर उजड़ गया। वह परिवार के साथ मुस्तफाबाद के अल हिंद अस्पताल में पिछले पांच दिनों से रह रहे हैं। बेटी की तीन मार्च को शादी थी, लड़के वालों ने हिंसा की वजह से रिश्ता तोड़ दिया। सिर से छत छिन गई, बेटी का रिश्ता टूट गया। लेकिन बन्ने खां ने अपनी बेटी के अरमानों को टूटने नहीं दिया। एक घंटे के अंदर उन्होंने दूसरा दूल्हा ढूंढा और उसी राहत शिविर में बेटी का निकाह पढ़वाया। बेटी विदा होने की जगह अभी भी कैंप में ठहरी हुई है।
बन्ने खां ने बताया कि वह गोविंद पुरी इलाके में रहते हैं, पेशे से मजदूर हैं। 25 फरवरी को हिंसा भड़क गई। किसी तरह से परिवार अपनी जान बचाकर मुस्तफाबाद पहुंचा। यहां अल हिंदू अस्पताल में बनाए गए राहत शिविर में शरण ली। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पहले उनकी बेटी रूखसाना का रिश्ता उत्तर प्रदेश के डासना के रहने वाले शोएब से हुआ। तीन मार्च को बारात आनी थी, उससे पहले दिल्ली में हिंसा होने लगे।

एक मार्च को उन्होंने शोएब के घर वालों से बात की तो उन्होंने कहा कि हिंसा की वजह से वह दिल्ली में शादी नहीं कर सकते। यह सुनते ही बन्ने खां के पैरों तले जमीन निकल गई, वह लड़के के घर वालों के सामने गिड़गिड़ाए। लेकिन उन्होंने एक न सुनी। बेटी का दिल न टूट जाए, उन्होंने बेटी को बिना बताए रिश्तेदारों में लड़कों की तलाश की। इसके बाद कृष्णा नगर में रहने वाले फिरोज के परिवार से उन्होंने पूरी बात बताई, जिसके बाद उसका परिवार इस शादी के लिए राजी हो गया।

मंगलवार रात को रुकसाना और फिरोज का राहत शिविर में ही एक काजी ने निकाह पढ़वाया। इस शादी में बारात नहीं आई, शिविर में रह रहे लोग ही शामिल हुए। फिरोज जोमैटो कंपनी में डिलीवरी ब्वॉय का काम करते हैं। रुकसाना का कहना है खुदा जिस हाल में रखे खुश रहना चाहिए।
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