लॉकडाउन : बेटे के इंतजार में चल रही थीं मां की सांसें, इंदौर से आते ही उसने तोड़ दिया दम

मां के हृदय में अपने बच्चों की कुशलता और भलाई की फिक्र हमेशा रहती है। फिर चाहे वह अपनी जिंदगी के आखिरी सफर के नजदीक ही क्यों न रहे। कई साल से लकवे की बीमारी से जूझ रही श्रीनगर गांव की जमुनाबाई की सांसें भी इंदौर में रहने वाले अपने बेटे की सकुशल घर वापसी के इंतजार में चल रही थीं।
इस संबंध में परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार जैसे ही 27 मार्च की रात बेटा घर पहुंचा तो मां ने बेटे को देखा और दुलारते हुए उसकी सांसों की डोर टूट गई। गोटेगांव तहसील के ग्राम श्रीनगर निवासी लक्ष्मण प्रजापति का बेटा लेखराम अपनी पत्नी और बेटी के साथ इंदौर के जीवन ज्योति नगर में रहकर मजदूरी कर रहा था। कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन की घोषणा हुई तो गांव में रहने वाली उसकी लकवा पीड़ित मां जमुनाबाई की चिंता बढ़ गई।

बताया जाता है कि बीमार मां की गंभीर होती स्थिति और उसकी चिंताओं की जानकारी बेटे लेखराम को लगी तो उसने इंदौर पुलिस से संपर्क कर घर आने के लिए पास बनवाया और किराए का वाहन लेकर 27 मार्च की रात घर आया। बिस्तर पर पड़ी जमुनाबाई ने जब बेटे को घर आया देखा तो उसे पास बैठाया और आंखों में ममत्व, दुलार के भाव दिखाते हुए अंतिम सांसें लेकर दुनिया से विदा हो गई।
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