यूं ही नहीं हैं ये अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह, मुकदमें गिनते थक जाएंगे आप!

अपराध की दुनिया मेंं इस शख्‍स की पहचान अहलदा है। कहा तो यही जाता है कि जिसने भी नजर मिलाने की कोशिश की उसकी खैर नहीं रही। जी हां, नाम है अखिलेश सिंह। लंबे समय से वह सलाखों के पीछे है। लेकिन क‍ितने दिन पुलिस सलाखों के पीछे रख पाएगी इसको लेकर आपराधिक गैंग और शहरवासियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल,इस चर्चा का कारण यह है कि वह आपराधिक मामलों में लगातार बरी होता जा रहा है। अबतक 17 मामलों में वह बरी हो चुका है। 32 मामलों में जमानत मिल चुकी है।
न्यायालय में उसके खिलाफ 20 आपराधिक मामलों की सुनवाई चल रही है। श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे के घर फायरिंग और अमित राय पर साकची मेंं  फायरिंग के दर्ज मामले वह कुछ दिन पहले बरी हो चुका है। इधर, कई मामलों में बरी होने के साथ कई अन्य मामलों में जमानत भी मिलती जा रही है। जबकि वरीय अधिकारी उसकी गिरफ्तारी पर हमेशा यही बयान देते रहे कि अखिलेश सिंह के विरुद्ध दर्ज मामलों में सही तरीके से अनुसंधान होगा। लगातार आपराधिक मामलों से बरी होना पुलिसिया अनुसंधान पर कई सवाल खड़े कर रहा है। उसके खिलाफ अधिकांश वैसे मामले हैं जो उसकी फरारी के दौरान दर्ज किए गए। 

जेलर उमाशंकर पांडेय की हत्या, पुलिस पदाधिकारी अरविंद कुमार पर फायङ्क्षरग और रवि चौरासिया पर हमला मामले में अखिलेश सिंह को सजा सुनाई जा चुकी है। जनवरी 2006 को जिला व सत्र न्यायाधीश की अदालत ने जेलर उमाशंकर पांडेय की हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अखिलेश सिंह की ओर से उच्च न्यायालय में अपील की गई। उसकी मां की तबीयत खराब होने के कारण 2007 में उच्च न्यायालय के आदेश पर पे रोल पर रिहा किया गया था। यह रिहाई कई शर्तों के साथ दी गई लेकिन उसके बाद वह फरार हो गया। 

फिर पकड़े जाने के बाद 2015 में जमानत पर रिहाई मिली। इसके बाद लंबी फरारी और जमानत शर्त के उल्लघंन के कारण झारखंड उच्च न्यायालय ने 2017 को औपबंधिक जमानत को निरस्त कर दिया था। शहर का गैंगस्टर अखिलेश सिंह फिलवक्त प्रदेश के दुमका जेल में बंद है। अक्टूबर 2017 में गुरुग्राम से गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ कुल 56 आपराधिक मामले जिले में दर्ज थे। उपेंद्र सिंह की हत्या समेत तीन मामले झारखंड उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन मामलों में सुनवाई इस माह के अंत तक चलने की संभावना है। अखिलेश सिंह के अधिकांश गुर्गे भी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। इनमें कन्हैया सिंह, सुधीर दुबे, हरीश सिंह, मनोज सिंह, अजय यादव समेत कई अन्य हैं।
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