लॉकडाउन : जेवर बेच खरीदना चाहता था राशन, कोतवाल ने ली जिम्मेदारी

लॉकडाउन के चलते कामकाज ठप हो गया। यहां तक की घर पर राशन बचा न रुपये। इस पर एक युवक अपनी पत्नी के जेवर लेकर साइकिल से बाजार को निकला। ये सोचकर की जेवर बेचकर जो पैसा मिलेगा, उससे वह राशन खरीद लेगा। मगर, रास्ते में उसे पुलिस ने रोका। कोतवाल ने पूछताछ की तो युवक की बाते सुन वह द्रवित हो गए। वह उसके घर गए और राशन मुहैया कराया। साथ ही अपन मोबाइल नंबर दिया कि जब जरूरत हो, फोन कर ले।
हम बात कर रहे हैं शहर के अहियारायपुर निवासी राजेश कुमार की। उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री आवास में वह अपनी पत्नी के साथ रहता है। किराये पर ई-रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का भरण पोषण करता है। लॉकडाउन के कारण उसका काम बंद हो गया। घर पर खाने के लाले पड़ गए। शुक्रवार को वह साइकिल से घर से निकला। पत्नी के जेवर जेब में डाले, ताकि उसे बेचकर मिली रकम से राशन खरीद सके। जहानाबाद के पास उसे रोका गया। कोतवाल अतुल कुमार सिंह ने जब उससे लॉकडाउन में घर से निकलने का कारण पूछा तो हक्का बक्का रह गए। 

वह पहले उसके घर गए, जेवर के बाबत तस्दीक की। फिर राजेश से जेवर लेकर उसकी पत्नी को सौंपा। उसके बाद वह राजेश को लेकर मंडी आए। सब्जी और दस दिन का राशन दिलाया। कहा कि लॉक डाउन तक यानी जब तक राजेश का काम शुरू नहीं होता, तब तक उसके घर पर सारी आवश्यक सामग्री वही भिजवाएंगे। इसके लिए उन्होंने अपना पर्सनल नंबर भी दिया। इस बाबत कोतवाल का कहना है कि राजेश की माली हालत ठीक नहीं है। उसके परिवार की जिम्मेदारी मैंने ले ली है। हमारी कोशिश है कि शहर क्षेत्र में कोई भूखा न रहे। इसके लिए जिसे जरूरत लगे, मुझसे संपर्क कर सकता है।
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