बेटी का अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाई मां और चली गई...

कोरोना महामारी का संक्रमण रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के कारण यहां की एक मां अपनी बेटी का अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाई। कोरोना के कारण स्कूल बंद होने पर यह बच्ची पिता के साथ अपने ननिहाल रतनगढ़  चली गई थी। वहां मंगलवार को सिढिय़ों से गिरने से मौत होने के बाद मां और भाई को लॉकडाउन के कारण रतनगढ़ वाहन ले जाने की इजाजत नहीं मिल पाई। परिजनों मां व भाई का इंतजार करते रहे लेकिन वे जब बुधवार को भी नहीं पहुंचे तो शाम को अंतिम संस्कार कर दिया। 
जिला परिवहन कार्यालय की संवेदनहीनता को लेकर शुक्रवार को परिजनों ने हंगामा किया तब कहीं जाकर जिला परिवहन कार्यालय ने अनुमति जारी की। उसके बाद बच्ची की मां, भाई और अन्य परिजन रतनगढ़ रवाना हुए। जब वे रतनगढ़ पहुंचे तो उन्हें पता चला कि बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद मां व भाई की रुलाई फूट पड़ी। परिजनों ने उन्हें ढांढ़स बंधाया लेकिन मां का रो-रो कर बुरा हाल था। रेलवेे क्वार्टर निवासी महेश कुमार राणा रतनगढ़ गए थे। लॉकडाउन के कारण उन्हें अपनी ससुराल में ठहरना पड़ा। २४ मार्च को घर में खेलते समय उनकी १३ वर्षीय बेटी सिढिय़ों से गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक दिपीका की मां यहां बीकानेर में अपने बेटे अभिषेक के साथ थी। 

उन्हें बच्ची के अंतिम संस्कार में शामिल होना था लेकिन परिवहन विभाग की संवेदनहीनता के चलते वे संस्कार में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने २५ मार्च को जिला परिवहन अधिकारी को वाहन से जाने की अनुमति मांगी लेकिन नहीं दी गई। उनके प्रार्थना-पत्र को परमिशन नोट अप्रूव्ड कर दिया गया। मृतका का भाई अभिषेक तीन दिन से अनुमति के लिए चक्कर काट रहा था। शुक्रवार को परिजनों ने पार्षद मनोज बिश्नोई को पीड़ा बताई। तब पार्षद बिश्नोई ने जिला परिवहन अधिकारी से वार्ता की और उन्हें मौत जैसे संवेदन मुद्दे पर भी परमिशन नहीं देने पर रोष जताया। साथ ही उन्होंने परमिशन नहीं देने पर धरना देने की चेतावनी दी।
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