लॉकडाउन : "अब मर भी जाएं तो गम नहीं..अपने गांव की मिट्‌टी तो मिलेगी"

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया जूझ रही है। इससे बचने के लिए मोदी सरकार ने लॉकडाउन तो कर दिया है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा बुरा असर उन लाखों गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है। जो दिनभर मेहनत करके अपने परिवार का पेट भरते थे। लॉकडाउन होने के चलते उनके सारे काम ठप हो गए हैं। 
इन लोगों को पास ना तो रहने के लिए छत बचा है और ना ही खाने के लिए दो वक्त का खाना। ऐसे हालातों में यह मजदूर हाजरों किलोमीटर दूर अपने घरों को जाने के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं। वहीं कुछ तो अपने घर पहुंच गए हैं तो कुछ अभी बीच रास्ते में हैं। 

वहीं गुजरात से अपने साथियों के साथ पैदल चले आ एमपी के  70 वर्षीय बुजुर्ग सुनील मिश्रा का कहना है कि अगर वहां रहते तो भूखे ही मर जाते। अब हम अपनी जन्मभूमि पहुंने वाले हैं। अगर अब हम मर भी जाते हैं तो कोई गम नहीं। कम से कम हमको मरने के लिए अपनी मिट्टी तो नसीब होगी।
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