कोरोना से निपटने के लिए आयरलैंड ने उठाया ऐसा कदम कि भारत में भी बढ़ गई इसे लागू करने की मांग....

दुनिया भर में कोरोना से 20 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, दुनिया भर के 186 देश इसकी चपेट में हैं और कई देशों में कोरोना ने कहर मचाया हुआ है. भारत में इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, कोरोना के भारत में अब तक 650 से ज्यादा मरीज मिले हैं और यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है. भारत सरकार द्वारा कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश भर को अगले 21 दिनों के लिए लॉकडाउन किया गया है. 
देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है गुरुवार को अब तक सबसे ज्यादा 4 मौत हुई हैं. जिसके साथ ही देश में मरने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है. जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में एक-एक मौत हुई है. जबकि बुधवार को तीन मौत हुई थी. कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए आयरलैंड सरकार ने एक ऐसा बड़ा कदम उठाने का फैसला किया जो अब तक अमेरिका और भारत सहित किसी देश ने भी उठाने का साहस नहीं दिखाया. 

आयरलैंड के स्वास्थ्य मंत्री साइमन हर्रिस ने इस फैसले को आवश्यक बताया है. आयरलैंड सरकार ने घोषणा की है कि सभी प्राइवेट अस्पताल कोरोनोवायरस महामारी की अवधि के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के हिस्से के रूप में कार्य करेंगे. 2,000 बेड, नौ प्रयोगशालाएं और हजारों कर्मचारी सार्वजनिक प्रणाली में तैयार किए गए हैं. 
स्वास्थ्य मंत्री साइमन हैरिस ने कहा "संकट की इस घड़ी में पब्लिक बनाम प्राइवेट के लिए कोई जगह नहीं हो सकती.  हमें निश्चित रूप से उपचार की समानता होनी चाहिए.  कोरोना वायरस के रोगियों को मुफ्त में इलाज किया जाएगा, और उन्हें एक एकल, राष्ट्रीय अस्पताल सेवा के हिस्से के रूप में माना जाएगा। इस संकट की अवधि के लिए राज्य सभी निजी अस्पताल सुविधाओं का नियंत्रण रखेगा और हमारे सभी लोगों के सामान्य लाभ के लिए सभी संसाधनों का प्रबंधन करेगा."

पिछली रात आयरलैंड गणराज्य में कोविद -19 के 219 मामलों की पुष्टि की गई थी, यहाँ कुल मामलों की संख्या 1,125 हो गई है. अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है.  इन आकड़ों को देखते हुए आयरलैंड सरकार द्वारा उठाया गया कदम सराहनीय है. यदि इस फैसले को भारत में भी लागू किया जाय तो गरीबों के लिए सबसे अधिक फायदा होगा. क्या लगता है आपको क्या यह सुझाव भारत सरकार को भी अपनाना चाहिए. 
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