लॉकडाउन : अजय, जिन्होंने लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए बेच दिया अपनी बुलेट, मिलिए इनसे!

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में पूरा देश एकजुट है। हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार मदद भी कर रहा है। इसी क्रम में मेरठ के लिसाड़ी गांव निवासी अजय ने ऐसी मिसाल कायम की है, जो दूसरों को प्रेरित कर सकती है। उन्होंने लॉकडाउन के चलते परेशान गरीब और दिहाड़ी मजदूरों की मदद के लिए अपनी बुलेट बाइक बेच दी। इससे मिली रकम से वह 120 परिवारों तक मदद पहुंचा चुके हैं। अजय के इस फैसले में उनकी पत्नी सोनिया ने भी साथ निभाया। यह कदम अजय ने उस समय उठाया, जब उनका खुद का कारोबार बंद पड़ा है और आमदनी का कोई दूसरा साधन नहीं है। लिसाड़ी गांव निवासी अजय का ऑटो पार्ट्स बनाने का काम है। परिवार में पत्नी सोनिया और दो माह की बेटी दिव्या है। 
अजय ने चार माह पहले ही दिवाली पर 1.92 लाख रुपये की बाइक किश्तों पर निकलवाई थी। 60 हजार रुपये नकद जमा कराए गए थे। इधर, कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन कर दिया गया। ऐसे में इलाके में सैकड़ों परिवारों के सामने राशन का संकट खड़ा हो गया। भूख-प्यास से बेहाल बच्चों व अन्य लोगों को देखा तो उनका दिल पसीज गया। अजय इन जरूरतमंदों की मदद करना चाहते थे लेकिन पैसों की कमी आड़े आ रही थी। उन्होंने पत्नी सोनिया से दिल की बात साझा की और बाइक बेचने का फैसला किया। पत्नी ने भी खुशी-खुशी सहमति दे दी। 

इसके बाद, अजय ने अपनी बाइक 50 हजार रुपये में बेच दी। इन पैसों से उन्होंने गेहूं खरीदा और अपने एक दोस्त को साथ लिया। पांच-पांच किलो के आटे के पैकेट बनाए। एक किलो चीनी, नमक व आधा लीटर तेल भी पैक किया। इस पैकेट को अजय ने अपने लिसाड़ी गांव, जाकिर कॉलोनी, श्यामनगर और बाकी जगहों पर सप्लाई करना शुरू कर दिया। अजय को जिस भी जरूरतमंद की सूचना मिलती गई, वो राशन लेकर उनके घर पहुंच गए। अभी तक अजय 120 परिवारों को राशन पहुंचा चुके हैं। 

अजय कहते हैं कि सरकार व्यवस्था कर रही है और मदद पहुंचा रही है, लेकिन इसमें एक-दो दिन का समय लगेगा। ऐसे में दिहाड़ी मजदूर क्या खाते? चूंकि मेरा भी काम बंद है और बिना काम और पैसों के कैसा लगता है, यह मुझे पता है। इस दौरान कोई भूख से मर गया तो उसे वापस कैसे ला पाएंगे। इसीलिए बाइक बेचकर लोगों की मदद की है। मेरे परिवार में पत्नी और एक बेटी ही है। ऐसा करने से पहले पत्नी सोनिया से सलाह की थी। पत्नी ने रजामंदी दे दी तो यह काम किया। अब लोगों की मदद करके सुकून मिलता है। ऐसा लगता है कि मैं और परिवार स्वर्ग में है। हम समाज के लिए कुछ करेंगे तो बाकी लोगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
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