कोरोना के चलते अल्कोहल फैक्ट्री बंद हो गई, दोबारा खुलवाकर सस्ता सैनिटाइज़र बना डाला...

कोरोना वायरस से बचने के कुछ उपायों में हैंड सैनिटाइज़र का उचित इस्तेमाल भी शामिल है. लेकिन छोटे शहरों में ये मुश्किल से मिलता है. मिलता भी है तो काफी महंगा. झारखंड का एक ज़िला है बोकारो. इसने सैनिटाइज़र की दिक्कत को करीब-करीब खत्म कर दिया है. कैसे? प्रशासन ने लोकल लोगों की मदद से खुद का सैनिटाइज़र बनाया. दाम- बाहर मिलने वाले सैनिटाइज़र की कीमत का पांचवा हिस्सा. केवल 220 रुपए में एक लीटर सैनिटाइज़र मिल रहा है.

कहां बना और किसने बनाया?
इस मामले पर बोकारो के डिप्टी कमिश्नर मुकेश कुमार से हमारी बात हुई. उन्होंने बताया कि झारखंड में जनता कर्फ्यू के दूसरे दिन से ही लॉकडाउन है. इसलिए उसी वक्त एक अल्कोहल फैक्ट्री को बंद करवा दिया गया था. डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत. बाद में जब प्रशासन ने देखा कि हैंड सैनिटाइज़र की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है और लोगों को मिल नहीं रहा है, तो खुद का सैनिटाइज़र बनाने को सोचा. फिर प्रशासन ने दोबारा उस फैक्ट्री को खुलवाया. सोशल एक्टिविस्ट, केमिकल इंजीनियर, एक्साइज डिपार्टमेंट के अधिकारियों और सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) के लोगों की मदद ली. सबने मिलकर हैंड सैनिटाइज़र बनाया. नाम दिया- स्माइलिंग बोकारो.

‘एक लीटर सैनिटाइज़र बनाने में हमें कुल 200 रुपए का खर्चा आ रहा है. 10 रुपए हम डिजास्टर चार्ज जोड़ रहे हैं. बोकारो के मेडिकल स्टोर में इसमें 10 रुपए और जोड़कर 220 रुपए का बेचा जा रहा है. ज़िले के अंदर 249 पंचायतें हैं. हमने सभी को फ्री में 10-10 लीटर सैनिटाइज़र दिया है. ANMs को, ब्लॉक ऑफिस, सब डिविज़नल ऑफिस को हमने मुफ्त में सैनिटाइज़र दिया है. इसके अलावा लॉकडाउन को लागू करवाने में तैनात पुलिसकर्मियों को भी फ्री में दे रहे हैं.’ इसके अलावा डिप्टी कमिश्नर ने ये भी बताया कि देवघर, पाकुड़ और जमशेदपुर ज़िले से भी सैनिटाइज़र की मांग उनके पास आई है. 
वो वहां भी जल्द ही ये सैनिटाइज़र पहुंचाएंगे. ज़िले के पास इस वक्त 10 हज़ार लीटर का स्टॉक है. आगे भी वो बनाते रहेंगे. तीन फ्रेगरेंस- लेमन, ऑरेंज और रोज़ में बनाया गया है. मुकेश कुमार का कहना है कि सैनिटाइज़र बनाने की प्रक्रिया के दौरान कोरोना वायरस से जुड़ी सारी गाइड लाइन्स का ध्यान रखा जाता है. लोग बराबर दूरी पर काम करते हैं. मुंह पर मास्क भी लगा होता है. इसके अलावा SHG के लोगों को पिक एंड ड्रॉप की सुविधा दी जा रही है. उन्हें दिन के काम के हिसाब से पैसे भी मिलते हैं. ‘स्माइलिंग बोकारो’ सैनिटाइज़र की बॉटल 250 एमएल, एक लीटर और पांच लीटर में उपलब्ध है. मुकेश का कहना है कि वो चाहते हैं कि ये सैनिटाइज़र ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे.
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