सऊदी अरब में बगावत, तीन शहजादों और शाही गार्डों को हो सकती है फांसी...

सऊदी अरब में एक बार फिर बगावत हो गयी है। सऊदी अरब के उदारवादी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान काफी लंबे अरसे से कट्टरमुल्लापंथियों के निशाने पर हैं। जब से सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज ने मुहम्मद को क्राउन प्रिंस बनाया है तभी से उनके खिलाफ बगावत की कोशिशें की जा रही हैं। 7 नवंबर 2017 को प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के खिलाफ बगावत की कोशिश की गयीं थीं। उस वक्त भी प्रिंस ने बगावत का झण्डा उठाने वाले अमीरों और राजकुमारों और कट्टरपंथी उलेमाओं को रिट्स कार्लटन होटल में कैद करवा दिया था। उस वक्त सभी राजकुमारों और अमीरों ने क्राउन प्रिंस के साथ समझौता किया और फिर एक-एक कर सभी रिहा कर दिये गये। एक बार फिर ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार की बगावत में कुछ शहजादों के अलावा शाही महल के आंतरिक सुरक्षागार्डों का भी हाथ है। सऊदी शासन इस बात को भी सख्ती से ले रहा है। 
ध्यान रहे, आले सऊद की आंतरिक सुरक्षा में पाकिस्तानी सिपाही भी हैं। सऊदी खुफिया एजेंसियां इस बगावत के तार पाकिस्तान से जुड़े होने के सुराग भी ढूंढ रही हैं। हालांकि अभी इस बात को बहुत गोपनी रखा गया है। क्योंकि इस्लामी कोलिएशन फोर्सेस की कमान भी पाकिस्तान के पूर्व आर्मी चीफ रहील शरीफ के पास है। इसलिए आले सऊद इस मामले में बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। बहरहाल, सऊदी शाह और क्राउन प्रिंस का तख्तापलट करने की साजिश के आरोप में राजकुमार नायेफ के छोटे भाई राजकुमार नवाफ बिन नायेफ को भी हिरासत में लिया गया है।

शाह के बेटे प्रिंस मोहम्मद ने इस्तांबुल दूतावास में अक्टूबर 2018 में आलोचक जमाल खशोगी की हत्या को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना का भी सामना किया। मुल्क के रक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था तक सभी बड़े मामलों को देखने वाले वास्तविक नेता के तौर पर देखे जा रहे क्राउन प्रिंस अपने 84 वर्षीय पिता शाह सलमान से औपचारिक रूप से सत्ता के हस्तांतरण से पहले आंतरिक असंतोष को खत्म करने की राह पर दिख रहे हैं। अमेरिका स्थित आरएएनडी कोरपोरेशन में नीति विश्लेषक बेका वासेर ने कहा, ‘प्रिंस मोहम्मद ने पहले ही अपनी राह में आने वाले खतरों को हटा दिया है और अपनी सत्ता के आलोचकों को जेल भेज दिया या उनकी हत्या करा दी है।’ उन्होंने कहा, ‘यह सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने की ओर एक कदम है और साथ ही शाही परिवार के सदस्यों समेत किसी के लिए भी संदेश है कि उनको हटाने की हिम्मत न करें।’ राजकुमार अहमद, खशोगी की हत्या के बाद लंदन से सऊदी अरब लौटे थे जिसे कुछ लोगों ने राजतंत्र के लिए समर्थन जुटाने के प्रयास के तौर पर देखा।
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