बिहार लौट रहे मजदूरों की मदद करने को आगे आए पप्पू यादव, दिए रुपये...

कोरोना वायरस की वजह से हुए देशव्यापी लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है. इनमें भी खासकर वैसे लोग जो दूसरे राज्यों में काम करते हैं. लॉकडाउन के कारण सभी कार्य बंद हैं और मजदूर वापस अपने घर लौटने को मजबूर हैं. हजारों लोग अपने परिवार के साथ राजधानी दिल्ली से वापस घर कूच कर रहे हैं. ट्रेन – बस बंद होने की वजह से ये सभी लोग सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पैदल ही कर रहे हैं. भूख और प्यास से बेहाल इन लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. ऐसे लोगों की मदद करने के लिए जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मधेपुरा के पूर्व सांसद पप्पू यादव आगे आए.
रविवार को पप्पू यादव ने दिल्ली से वापस बिहार लौट रहे कई लोगों की आर्थिक मदद की. पप्पू यादव ने कहा कि दिल्ली के धौला कुंआ, मोतीबाग, पालम मोड़, शांति भवन और महिपालपुर से जो लोग अपने घर को लौट रहे हैं अभी हमने उन्हें आंशिक रूप से आर्थिक मदद की है ताकि वे भूखे न रहें. इन लोगों के पास खाने-पीने की भी कमी है.अब बस यही उम्मीद है कि किसी तरह ये लोग अपने-अपने घरों तक सुरक्षित पहुंच जायें.

केंद्र और राज्य सरकार के बारे में जाप अध्यक्ष ने कहा कि चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारों ने इन्हें इनके हाल पर छोड़ दिया है. कोरोना से पूरा देश लड़ रहा है मगर इनकी लड़ाई कोरोना के साथ-साथ भूख और थकान से भी है. सरकार बस घोषणा कर रही है, लेकिन उसका फायदा जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है. रतन टाटा जैसे कई पूंजीपति और सेलीब्रेटी भी मदद करने आगे आए हैं. लेकिन देश की आम जनता द्वारा चुनी हुई सरकार इनकी मदद नहीं कर रही.

आगे उन्होंने कहा कि मैं तो राजनीति में जनता की सेवा करने के लिए ही हूं. मुझसे इनका दर्द देखा नहीं जाता है. आखिर ये लोग भी तो अपने ही हैं. इसी भारत के नागरिक हैं, फिर भी प्रधानमंत्री और तमाम राज्यों के मुख्यमंत्री को इनकी चिंता क्यों नहीं है? ये सवाल राजनीतिक जरूर है लेकिन जायज है. यह आम जन की जिंदगी और मौत का सवाल का है. अगर तुरंत इन्हें सहायता नहीं पहुंचाई गई तो कई लोग कोरोना से पहले भूख से मर जाएंगे.

घर लौट रहे एक व्यक्ति ने कहा कि हमारे पास न खाने के लिए पैसे हैं और न ही कहीं ठहरने की कोई व्यवस्था. ऐसे में पप्पू यादव जी एक फरिश्ते की तरह आए और हमारी मदद की. हम सब उनके आभारी हैं, जो उन्होंने इस विकट परिस्थिति में हमारी मदद की. हम सब उनको दिल से धन्यवाद कहते हैं.

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