सास के 100 साल पुराने संदूक को बहू ने जब खोला तो मिला दुर्लभ सिक्कों का जखीरा! और फिर....

कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन जहां एक तरफ जहां लोग अपने परिवार के साथ समय बीता रहे हैं तो वहीं लोगों को बुजुर्गाें द्वारा संभाल कर रखी गई वस्तुएं भी रही हैं जिन्हें पाकर वे बेहद खुश है। ऐसा ही अनमोल सिक्के एक परिवार को जब मिले जब वो अपने बुजुर्गाें द्वारा रखे गए सामान को साफ कर रहे थे। पुराने सिक्कों को पाकर एक तरफ जहां परिवार के सदस्य खुश हैं तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें इस विरासत को अब अपने बच्चों को दिखाने का मौका मिलेगा तथा पता चलेगा कि अंग्रेजों के समय में किस प्रकार के सिक्के भारत में चलते थे।
कोराना के चलते लॉकडाउन मेंमहिलाएं साफ सफाई अभियान में जुटी हुई है। इसी अभियान के दौरान कुरुक्षेत्र में जब एक बहू ने अपनी दादी सासू मां की वर्षाें पुरानी बंद पड़ी संदूक खोली तो उसमें जो रखा मिला उसे देखकर वह हैरान रह गई। बंद संदूक में 1918 से लेकर 2000 तक के सिक्के मिले हैं जिन्हें बहू ने अच्छी तरह से साफ किया तथा उन्हें पाकर बेहद खुश नजर आई। परिवार के सदस्यों का कहना है कि बाजार खुलने के बाद उन्हें फ्रेम में तैयार करवाएंगे ताकि वो सुरक्षित रखा हो सके तथा आने जाने वाले लोग इतनी प्राचीन सिक्कों को देख सके ।

इस बारे में जब परिवार की बहू पूजा से बात हुई तो उन्होंने बताया कि वैसे वो चंडीगढ़ रहते हैं लेकिन लॉकडाउन में अपनी सुसराल में कुरुक्षेत्र रह रहे हैं। रविवार को पुश्तैनी मकान में जब घर की सफाई कर रहे थे उपर वाले कमरे में एक संदूक रखी मिली। जिसे खोलने के लिए जब सासू मां से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह संदूक उनकी दादी सासू मां की है इसलिए उसे बहुत कम खोला है आखिरी निशानी के तौर पर उसे रखा गया है। जब पूजा ने उस संदूक को साफ करने के लिए उसमें रखा सामान निकाला तो एक डिब्बे में सिक्के रखे हुए थे पहले तो उन्हें समझ नहीं आया कि ये क्या हैं लेकिन जब उन्हें गौर से देखा तो उसमें अंगे्रजों के समय में जो कैरेंसी भारत में इस्तेमाल होते थे।

पूजा ने बताया कि सिक्कों में सबसे पुराना सिक्का सन 1918 का है। इसके अलावा 1939, 1942,1943, 1944,1945,1947,1964,1965,1981,1982,1984,1985,1986,1988,1991,2001 के पुराने सिक्के शामिल थे। इसके अलावा उनकी सासू मां ने एक रुपये का एक, दो, पांच तथा 10 के नोट अलग से संभालकर थे।

हम लोगों को इनसे सीखना चाहिए!

हमारे बड़े बुजुर्गाें की आदत तथा स्वभाव हमेशा से ऐसा रहा है कि वो कीमती चीजों को संभाल कर रखते हुए आ रहे हैं। आज बड़े बुजुर्गाें के पास वो सब सामान उपलब्ध मिलता है जिन्हें देखने के लिए लोग तरस जाते हैं। जब पूजा की सासू मां से बात हुई तो उन्होंने बताया कि उनकी सास 2004 में स्वर्ग सिधार गई थी तथा जब उनकी उम्र 60 साल थी यानि की उनकी सास की सास इन सिक्कों को संभाल कर रखती हुई आ रही थी। परिवार के सदस्यों को इतना कीमती सिक्के मिलने पर खुशी है तथा उन्होंने कहा कि इन सिक्कों को संभालकर कर रखेंगे ताकि बच्चों को भी प्राचीन सिक्कों के बारे में जानकारी मिल सके।