16 मई के बाद नहीं मिलेगा नया कोरोना केस, पढ़िए क्या है ये केन्द्र सरकार की नई थ्योरी

16 मई के बाद देश में कोरोना के मामलों में कमी आ जायेगी. नीति आयोग के सदस्य और कोरोना के खिलाफ गठित टास्क फोर्स-एक के प्रमुख डाक्टर वी के पॉल ने देश में कोरोना के केस में बढ़ोतरी के ट्रेंड और उसके आधार पर भविष्य के प्रोजेक्शन का ग्राफ दिखाया. इसके मुताबिक देश में लागू हुए लॉकडाउन का असर दिख रहा है. कोरोना के प्रसार में कमी आयी है. अब कोरोना मामलों के दोगुने होने की दर में भी गिरावट आ रही है. 
डॉ वी के पॉल ने कहा कि 21 अप्रैल से शुरू हुए पांचवें सप्ताह में अबतक के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना के मामलों के दोगुना होने में 10 दिन का समय लग रहा है. प्रोजेक्शन ग्राफ के मुताबिक 3 मई से भारत में प्रति दिन 1,500 से अधिक नये मामले आयेंगे, इस समय कोरोना मामलों की संख्या अपने चरम पर होगी. हालांकि उसके बाद फिर मामले घटने शुरू होंगे और 12 मई तक 1000 मामले प्रतिदिन आयेंगे. जो धीरे धीरे घटकर 16 मई तक शून्य हो जायेगा.

'द हिंदू' पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पहचान नहीं बताने की शर्त पर एक स्वतंत्र विशेषज्ञ ने कहा कि कोरोना मामलों में बढ़ोतरी के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख राज्य मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जहां ज्यादा मामले दर्ज किये जा रहे हैं. राष्ट्रीय औसत में गिरावट के लिए इन राज्यों के मामलों में कमी लानी होगी. पर अभी तक इन राज्यों में गिरावट के ट्रेंड नहीं दिखाई दे रहे हैं. अब किस आधार पर कोरोना मामलों में गिरावट का पूर्वानुमान किया गया है यह देखना होगा. हम मानकर चल रहे हैं कि यह लंबा चलेगा इसलिए हमारी तैयारी पूरी है. 

पिछले दिनों इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने एक रिसर्च स्ट्रेटजी भी प्रकाशित की थी, जिसमें आधार पर अप्रैल महीने में जांच पूरी कर लेने की कही गयी थी. हालांकि यह पेपर 31 मार्च को संसाधनों के मूल्यांकन के आधार पर तैयार किया गया था. इसके मुताबिक संक्रमण का पता लगाने के लिए अप्रैल में कम से कम एक लाख किट की जरूरत बतायी गयी, मई में 2.1 मिलियन आरएनए परीक्षण किट और जून में 2.8 मिलियन किट की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया था.

आइसीएमआर द्वारा अब तक 5.4 मिलियन नमूनों का परीक्षण किया है. स्वतंत्र विशेषज्ञ ने रिसर्च स्ट्रेटजी के आधार पर कहा कि आने वाले महीनों में कम से कम लोगों का परीक्षण किया जाएगा. इसमें संक्रमण को कम करने के लिए सामुदायिक निगरानी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एंटीबॉडी परीक्षण किट भी शामिल नहीं हैं. एक अन्य स्वतंत्र विशेषज्ञ ने डॉक्टर को मैसेज भेज कर स्पष्टीकरण देने का अनुरोध किया है कि आखिर किस आधार पर कोरोना मामलों में गिरावट का प्रोजेक्शन तैयार किया गया है. उनका मानना है कि प्रोजेक्शन में जैसा दिखाया गया है इस तरह के गिरावट की संभावना नहीं है.