"लोग 21 दिन में ही बेचैन हो गए, और हम तो 17 साल से झेल रहे हैं लॉकडाउन"

कटनी जिले से लगभग 50 किमी दूर का गांव खिरवा खुर्द में गेहूं की फसल कटाई के लिए थ्रेसर के ढीले नट बोल्ट को कसते नारायण केवट। विजयराघवगढ़ क्षेत्र में आने वाला यह गांव सतना जिले की मैहर की सीमा से सटा हुआ है। गांव में सभी समुदाय को मिलाकर 150 से अधिक परिवारों की बस्ती हैं, लेकिन इस गांव के लोगों को लॉक डाउन से कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इस गांव के लोग पिछले 17 साल से लॉक डाउन का ही पालन कर रहे। 
तीन तरफ से महानदी से घिरे गांव के चारों तरफ पानी भरा रहता है। ये कहीं आ जा भी नहीं सकते। गांव के नारायण केवट, कपिल मिश्रा, रामनाथ केवट, कल्लू केवट का कहना है कि 21 दिन के लिए हुए लॉक डाउन में लोग इतने बैचेन हो गए कि घर पर रहना ही नहीं चाह रहे। हम तो 2003 से ही लॉक डाउन का पालन कर रहे। जिदंगी जी रहे। गुलाब यादव, गया केवट, धर्मेंद्र केवट, संजू केवट, शुभम मिश्रा, रमेश पटेल, सुजान पटेल, राजेश केवट ने बताया कि गांव में आने जाने का साधन नहीं है। 

डूब प्रभावित गांव होने की वजह से यह तीन तरफ से पानी से घिरा हुआ है। आवागमन का साधन नहीं है। किसी की तबियत खराब हो जाए या इमरजेंसी में आना जाना पड़ जाए तो नाव का सहारा लेकर मैहर जाते है। शहर की तरफ आते है। गांव में कोई वाहन 9 माह प्रवेश नहीं कर सकता। फसल खेत मेे खड़ी है यदि चाहे की हार्वेस्टर को बुलाकर कटवा ले तो यह भी संभव नहीं है।