"ड्यूटी पर हैं गाली मत दो, मैंने भी 30 दिन से घरवालों का मुंह नहीं देखा" लोग हमें समझते नहीं हैं!

हम लोग घरों में लॉकडाउन हैं, लेकिन ऐसे हजारों लोग हैं जो हमारे लिए सड़कों-अस्पतालों-गलियों में हैं. इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं जो समाज के साथ-साथ अपने परिवार के लिए भी त्याग कर रहे हैं. ऐसी ही एक फ्रंटलाइन वॉरियर सब इंस्पेक्टर उषा कुशवाहा के बारे में जानिए. 'पुलिस की नौकरी को ढाई साल हो गए ऐसा कठिन दौर पहले कभी नहीं देखा. दुख तब होता है जब लोग समझते नहीं हैं और हमें ही गाली देते हैं या पत्थर फेंकते हैं.' नोएडा सेक्टर 20 थाने में सब इंस्पेक्टर के तौर पर तैनात उषा कुशवाहा लॉकडाउन ड्यूटी के बारे में पूछे जाने पर कुछ इसी अंदाज में अपनी बात कहती हैं. कड़ी धूप में मुंह पर मास्क बांधे सड़क पर ड्यूटी कर रही उषा कुशवाहा को हर दिन अपने सात सदस्यों वाले परिवार की याद आती है. आजतक से बातचीत में उषा बताती हैं कि‍ मेरा घर गाजियाबाद में ही है. थाने से घर जाने में एक घंटे का भी समय नहीं लगता. परिवार में मेरे माता-पिता के अलावा मेरे दो भाई भाभी, बहन सब हैं. पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैं अपने घरवालों से हफ्ते दो हफ्ते में न मिलूं. अब लेकिन एक महीने से ज्यादा समय हो गया है, मैंने उन सबका मुंह भी नहीं देखा. मैं यहीं थाने में कमरा लेकर रह रही हूं. यहां अपना खाना बनाने से लेकर वर्दी धोने तक का काम मैं खुद करती हूं. अभी कहीं से कोई सर्विस भी नहीं मिल रही, उस पर पूरी ड्यूटी भी है.

उषा बताती हैं कि घरवाले आने के लिए कह रहे हैं, लेकिन मैं उनसे मिलने नहीं जा रही. मुझे भीतर से डर लगता है कि कहीं मेरी वजह से मेरे परिवार में कोई रिस्क में ना आ जाए. इसलिए मैं अकेली रह रही हूं. लेकिन दुख तब होता है जब लोग बिना वजह लॉकडाउन तोड़ते हैं या फिर हमारे साथ ही अभद्रता से पेश आते हैं. वो एक वाकया कुछ यूं बताती हैं.

मार्च में जब लॉकडाउन लगा ही था, उसी दौरान पास की झुग्गी-झोपड़ी के लिए राशन बंटने के लिए थाने में आया. बता दें कि इस इलाके आसपास बड़ी संख्या में झुग्गी झोप‍ड़‍ियां हैं, सो यहां महिलाओं की भीड़ भी काफी ज्यादा थी. जब राशन खत्म हो गया तो जिन महिलाओं को नहीं मिल पाया, उन्होंने हम पर पथराव शुरू कर दिया. गाली-गलौज करने लगीं. बड़ी मुश्किल से फोर्स बुलाकर उन पर काबू पाया गया.

उषा कहती हैं कि ये अकेली घटना नहीं है, मैंने अक्सर देखा है कि बिना वजह ही लॉकडाउन तोड़ने वालों को टोक दो तो वो पुलिस पर ही हावी होने की कोश‍िश करने लगते हैं. उन लोगों को ये जरूर सोचना चाहिए कि हम जो भी कर रहे हैं, जनता की सुरक्षा और अपनी ड्यूटी के तौर पर कर रहे हैं. हमारे साथ अभद्र तरीके से पेश आने से पहले एकबार आपको ये जरूर सोचना चाहिए कि हम भी आपकी ही तरह ही इस माहौल में रह रहे हैं.