कोरोना बचाव से जुड़ी ये 3 बातें कई और बीमारियों से भी आपको करती हैं सुरक्षित!

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में कोहराम मचा हुआ है। इससे बचाव के लिए तीन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा जा रहा है। इनमें बार-बार हाथ धोना, नाक-मुंह को ढककर रखना और सोशल डिस्टेंसिंग यानी लोगों के बीच एक-दो मीटर की दूरी होनी चाहिए। ये बातें आपको न केवल सिर्फ कोरोना वायरस से बचाती हैं बल्कि सैकड़ों दूसरी बीमारियां से भी सुरक्षित रखती हैं। ऐसा कर हर वर्ष लाखों-करोड़ों लोगों को बचाया जा सकता है। 

1. इसलिए भी बार-बार हाथ धोना चाहिए
बार-बार हाथ धोने से वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ और अमीबा आदि परजीवी से बचाव होता है। इनसे आंतों की समस्या, हैजा, उल्टी, मियादी बुखार, पीलिया, फ्लू, हेपेटाइटिस आदि बीमारियों का खतरा रहता है। जब आप कीटाणु वाले हाथ से दूसरों से मिलाते हैं तो उसे भी खांसी-जुकाम होने का खतरा बढ़ा देते हैं। हाथ में हमेशा स्टेफिलोकोकाई और क्लोस्ट्रिडिया किटाणु मौजूद रहते हैं। इससे खूनी दस्त, किडनी और यूरिन ट्रैक का इन्फेक्शन होता है। कई अन्य बीमारियां हो सकती हैं। 

हाथ धोने का मतलब यह नहीं कि सिर्फ पानी से धो लें। हाथ धोने के लिए साबुन का इस्तेमाल करें और हाथ को अच्छी तरह रगड़ कर धोएं ताकि धूल-मिट्टी निकल जाएं। अगर नियमित केवल साबुन पानी से 20 सेकंड तक हाथों को धोते हैं तो 99 फीसदी तक बचाव होता है। जब भी किसी घाव या चोट को छू रहे हैं, तो हाथ जरूर धोएं। खांसने-छींकने, होटल, रेस्टोरेंट, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर आदि में कुछ इस्तेमाल करने से पहले और बाद में हाथ जरूर धोएं। 

2. नाक-मुंह को ढकने के फायदे 

वायरस-बैक्टीरिया नाक, मुंह, आंख के रास्ते शरीर में पहुंच जाते हैं। इससे सीजनल फ्लू के साथ ही जीका, इबोला, स्वाइन फ्लू, निमोनिया, क्षय रोग यानी टीबी और वयस्कों में आइएलडी यानी इंटरस्टीशियल लंग डिजीज का खतरा रहता। सांस नलियां सिकुड़ जाती हैं। बच्चों में कालीखांसी होती है। मास्क लगाने से प्रदूषण से भी बचाव होता है। नाक-मुंह ढकने से न केवल संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण नहीं फैलता, बल्कि स्वस्थ्य व्यक्ति बीमार नहीं होते हैं। वैसे तो स्वस्थ व्यक्तिको अच्छे वातावरण में मास्क लगने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन जहां जरूरत इसका उपयोग करें। मास्क नहीं है तो कपड़े या रुमाल से ही नाक-मुंह को ढक लें। बचाव होगा। 

3. सोशल डिस्टेंसिंग 

कोरोना से बचाव के लिए तीसरा और सबसे बड़ा हथियार सोशल डिस्टेंसिंग है। इसमें एक से दूसरे व्यक्ति के बीच में 6-7 फीट की दूरी होनी चाहिए। इसमें फिजिकल जुड़ाव नहीं होना चाहिए। न ही उसके कपड़े, बिस्तर या फिर बर्तन आपस में साझा नहीं करना चाहिए। नियमित सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जाए तो स्किन की अधिकतर बीमारियों से बचाव होगा। स्केबिज, चिकनपॉक्स और मीजल्स के साथ आंखों की बीमारियां कंजंक्टिवाइटिस, केराटाइटिस आदि से भी बचाव होगा। सोशल डिस्टेंसिंग में एक दूसरे से दूरी बनाकर रहें। बाहर जाना पड़े तो भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। किसी का इस्तेमाल किया कपड़ा, रुमाल बर्तन, बिस्तर का उपयोग में न लें। यदि घर में हैं तो ïघर हवादार और खुला होना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संक्रमण दूसरे में न फैले।