दुनिया अभी कोरोना से उबरी नहीं थी की फिर आ गया इबोला, इस देश में 50 दिन में हुई पहली मौत!

पूरी दुनिया एक तरफ कोरोना वायरस से जूझ रही है। वहीं अफ्रीका का एक देश एक साथ दो महामारियों का शिकार हुआ है। कॉन्‍गो रिपब्लिक की सरकार ने तो खुद को इबोला मुक्‍त घोषित करने की तैयारी कर ली थी। मगर वहां पर एक इबोला मरीज की मौत हो गई। 50 से ज्‍यादा दिन गुजर चुके थे और इबोला का नया मामला नहीं आया था मगर इस मौत ने सरकार की कोशिशों पर पानी फेर दिया। कॉन्‍गो पहले से ही विद्रोहियों के हमलों से जूझ रहा था। इन दो ग्‍लोबल महामारियों ने उसकी कमर तोड़कर रख दी है।

कॉन्‍गो में 17 फरवरी के बाद इबोला का यह पहला मामला है। 26 साल के एक युवक में 27 मार्च को लक्षण दिखने शुरू हुए। उसे अस्‍पताल में भर्ती कराया गया जहां गुरुवार को उसकी मौत हो गई। अगस्‍त 2018 के बाद से कॉन्‍गो में इबोला ने 2200 से ज्‍यादा लोगों की जान ली है। देश में विद्रोहियों के हमले भी लगातार जारी हैं। वहीं, खसरे जैसी महामारी भी इस देश में फैल रही है।

इंटरनेशनल रेस्‍क्‍यू कमिटी के रीजनल वाइस प्रेसिडेंट केट मोगर ने रॉयटर्स से कहा, "यह अब ट्रिपल इमरजेंसी है। मानवता के संकट से एक बड़ी आबादी जूझ रही है, COVID-19 फैल रहा है और अब इबोला संकट फिर से पैर पसारता नजर आ रहा है।" वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) का मानना है कि कॉन्‍गो में इबोला के और मामले सामने आ सकते हैं। इबोला में मरीज को बुखार, ब्‍लीडिंग, उल्‍टी आना और डायरिया जैसी समस्‍याएं होती हैं। अभी जो महामारी फैली है, उसने इन्‍फेक्‍शन के शिकार एक-तिहाई लोगों की जान ले ली है।

साल 1976 में पहली बार मानव में इबोला वायरस का पता चला। इसके बाद से कॉन्‍गो में इस वायरस के 10 आउटब्रेक्‍स हो चुके हैं। साल 2013 और 2016 के बीच वेस्‍ट अफ्रीका में इबोला के चलते 11 हजार से ज्‍यादा लोगों की जान गई। दो नई वैक्‍सीन डेवलप होने के चलते इस बार वायरस का असर थोड़ा कम रहा मगर कुछ इलाकों में इस्‍लामिक विद्रोहियों ने हेल्‍थ वर्कर्स को पहुंचने नहीं दिया।