लॉकडाउन में ये किसान बन गया 6 हजार परिवारों का सहारा, ज़िंदगी भर की कमाई बाँट रहा है सभी ज़रुरतमंदों में...

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में अब तक 9 हजार 756 कोरोना के सक्रिय मामले हैं, जबकि अब तक 377 लोगों की देशभर में मौत हो चुकी है। कोेरोना वायरस का संक्रमण और न फैले, इसके लिए भारत में इस वक्त लाॅकडाउन चल रहा है। इस लॉकडाउन के दौरान देश के कई हिस्सों में बहुत से ऐसे परिवार हैं, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। इस दौरान कोई भी भूखा पेट न सोये, यह सुनिश्चित करने की कोशिश सरकार के साथ आमजनों की ओर से भी लगातार की जा रही है।
राजस्थान के जोधपुर के उम्मेदनगर के एक किसान ने कुछ ऐसा किया है इसकी चर्चा हर ओर हो रही है। इस किसान ने लॉकडाउन के इस दौर में अपने गांव के आसपास स्थिति 80 गांवों के लगभग 6 हजार परिवार वालों की मदद का बीड़ा उठा रखा है। जिंदगीभर जो कमाई इस किसान ने की है, अब उसी कमाई से यह किसान इन सभी जरूरतमंद परिवारों का पेट भरने में जुटा है। इनके लिए वह भोजन का इंतजाम कर रहा है।

किसान का नाम पाबूराम मंडा बताया जा रहा है। इस किसान ने अपनी पत्नी मुन्नीबाई के साथ मिलकर लॉकडाउन लगने के बाद जरूरतमंदों की मदद करने का निर्णय कर लिया। अब तक जिस तरीके से पाबूराम ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर जरूरतमंदों की मदद की है, उसे देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 50 लाख रुपये वे अब तक इस पर खर्च कर चुके हैं। 
पाबूराम की ओर से अब तक दो हजार से भी अधिक परिवारों की मदद की जा चुकी है। परिवार वालों को अनाज व अन्य सामग्री इनकी ओर से भेजी जा रही है। पाबूराम के बेटे रामनिवास भी माता-पिता के इस नेक काम में उनके साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर काम करते नजर आ रहे हैं।
पाबूराम का एक बेटा दिल्ली में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में डिप्टी कमिश्नर है। बेटा का नाम है डॉ भागीरथ मंडा। बेटे ने बताया था कि कभी भी उन्होंने यह नहीं सोचा था कि उनके माता-पिता कोरोना वायरस के इस संकट की घड़ी में लोगों की मदद करने का इतना नेक कदम उठाएंगे और वह भी इतनी तेजी से। भागीरथ ने कहा कि उनके माता-पिता जोधपुर के ओसियां और तिंवरी तहसील के करीब 80 गावों के जरूरतमंद लोगों की मदद करने में जुटे हैं। उनका बेटा होकर वे खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
मंडा परिवार की ओर से राशन सामग्री अब तक दो हजार परिवारों तक पहुंचाई जा चुकी है। साथ ही चार हजार और परिवारों को वे राशन सामग्री पहुंचा रहे हैं। छोटे वाहनों पर लादकर वे अलग-अलग गांवों में आनाज और बाकी खाद्य सामग्री पहुंचाने में जुटे हुए हैं। हर परिवार को राशन के पैकेट उनकी ओर से दिये जा रहे हैं। इन पैकेट में आटा, तेल, साबुन, धनिया, दाल, नमक, मिर्ची, हल्दी, माचिस और बिस्किट जैसी चीजें शामिल हैं। एक पैकेट पर लगभग 750 रुपये का खर्च आता है।