90 साल के मां बाप को बच्चों ने छोड़ दिया तो थानेदार बन गया 'श्रवणकुमार', भोजन से लेकर दवा तक का कर रहे हैं इंतजाम!

एकतरफ जहां कोरोना को लेकर समूचे देश भर में भय का माहौल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संकट के समय में एकजुटता और आत्मविश्वास का संदेश देने के लिए देशवासियों से कभी ताली-थाली तो कभी दीए जलवा रहे हैं. ऐसे समय में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इस त्रासदी के समय में जरूरतमंदों की मदद करके रियल हीरो की भूमिका में उभर रहे हैं. एक ऐसा ही रियल हीरो है जो आज एक बुजुर्ग दम्पत्ति के लिए मसीहा बन गया है और लोग उसे दयावान कह कर पुकारने लगे हैं. पटना पुलिस (Patna Police) के कंकड़बाग थाने के थानेदार मनोरंजन भारती ने वह कर दिखाया है जो अमूमन आप फिल्मों में देखा करते हैं. रील लाइफ की चीज रियल लाइफ में उतर कर सामने आ गई है और मनोरंजन भारती जैसे लोग बिहार पुलिस के लिए एक मिसाल बन गए हैं.
राज्य कोई भी हो पर जब पुलिस की बात आती है तो लोग थोड़े सहम से जाते हैं. लोगों के भीतर पुलिसवालों को लेकर एक अलग सी धारणा है कि पुलिसवाले डंडे और गोली की बात करते हैं. ऐसे में बिहार पुलिस के एक थानेदार ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जो पुलिस को उसकी 'पुलिसिया' छवि से बाहर निकालती है और उसे एक मानवीय चेहरा प्रदान करती है. दरअसल यह कहानी है एक बुजुर्ग दंपत्ति की, जो पटना के कंकड़बाग इलाके में रहते हैं. लॉकडाउन और इस त्रासदी के समय में इन बुजुर्गों को उनके अपनों ने ही अकेला छोड़ दिया है. इनके दो बेटे और बेटी हैं, लेकिन संकट के इस समय में दोनों बेटों ने इनसे मुंह मोड़ लिया है. ऐसे में कंकड़बाग थाने के इंस्पेक्टर मनोरंजन भारती अब इस बुजुर्ग दम्पत्ति के रखवाले बन गए हैं और इन्हें खाना और दवाइयां इनके घरों तक पहुंचा रहे हैं.

जब न्यूज18 ने इस बुजुर्ग दम्पत्ति का दर्द जानने की कोशिश की तो 90 साल के कानन बिहार भौमिक बहुत भावुक हो जाते हैं और कहते हैं कि ये पुलिसवाला मेरा बेटा नहीं, हम बुजुर्गों के लिए भगवान बनकर आया है. यह कहकर वह फफक-फफफ़ कर रो पड़ते हैं. साथ में बैठी उनकी धर्मपत्नी रूबी भौमिक भी रोने लगती हैं और पुलिसवाले को कहती हैं कि हमने तुमको कोख में तो नहीं पाला फिर तुम श्रवण कहां से आ गए. ये सुनते ही थानेदार मनोरंजन भारती भी रो पड़ते हैं फिर हम भी खुद को रोक नहीं पाते.

जब से लॉकडाउन हुआ है ये बुजुर्ग दम्पत्ति घर से बाहर नहीं निकल पा रहे थे और उनके घर में अनाज भी नहीं था. ऐसे में भूख से तड़प रहे कानन बिहार भौमिक ने कंकड़बाग थाने में फोन लगाया और कहा कि आप इंस्पेक्टर साहब बोल रहे हैं. हम दो बूढ़े लोग हैं जिन्होंने तीन दिन से खाना नहीं खाया. इतना सुनते ही इंस्पेक्टर मनोरंजन भारती ने फोन पर कहा कि बाबू जी हम आपके बेटे हैं तुरंत आप दोनों के लिए खाना लेकर आते हैं. उसके तुरत बाद मनोरंजन भारती अपने थाने की टीम के साथ सीधे रेंटल फ्लैट पहुंचते हैं जहां छोटे से एस्बेस्टस वाले कमरे में ये बुजुर्ग दम्पत्ति किसी तरह से रहते हैं. थानेदार ने जैसे ही इस दम्पत्ति को खाने का पैकेट दिया ये दोनों फूट-फूट कर रो पड़े और फिर दोनों कहते हैं भगवान इस धरती पर हैं और धन्य है वो मां-बाप जिसने इस पुलिसवाले को जन्म दिया है क्योंकि हमने जिसे जन्म दिया उसने तो हमें मंझधार में छोड़ दिया.