लॉकडाउन में एम्बुलेंस नहीं मिला तो बेटे को गोद में लेकर दौड़ी माँ, लेकिन माँ को क्या पता था की उसका लाल हमेशा के लिए "सो" चुका है!

लॉकडाउन के दौरान आपको कुछ ऐसी तस्वीरें मिली जिन्होंने इंसानियत की मिसाल पेश की। लेकिन बिहार के जहानाबाद जिले में एक पिता ने स्थानीय अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि लापरवाही के चलते एंबुलेंस न मिलने पर 3 साल के बच्चे की मौत हो गई। 'एंबुलेंस नहीं मिला, मां की गोद में त्याग दिए प्राण' जहानाबाद सदर अस्पताल में शुक्रवार की दोपहर जो हुआ उसे देख कर हर मां, हर बाप का कलेजा चाक हो जाएगा। 
मां की गोद में 3 साल के एक बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। मां-बाप का आरोप है कि ये सबकुछ सिस्टम की लापरवाही की वजह से हुआ। अरवल जिले के कुर्था थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव के रहने वाले गिरिजेश कुमार के 3 साल के बच्चे ऋशु को खांसी और बुखार था। 10 अप्रैल को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर गिरिजेश अपनी पत्नी के साथ ऋशु को लेकर कुर्था के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां बच्चे की तबीयत ज्यादा खराब देख कर उसे अरवल सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। 
पीएचसी के पास एंबुलेंस न मिल पाने के कारण बच्चे को उसके घरवाले एक ऑटो से लेकर जहानाबाद सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बच्चे की बिगड़ती हालत देखते हुए उसे PMCH रेफर किया। बच्चे के पिता गिरिजेश का आरोप है कि लाख जतन करने के बाद भी सदर अस्पताल से उन्हें एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई गई और इसी की वजह से उनके बच्चे की जान चली गयी। 
बच्चे के पिता के मुताबिक लॉकडाउन होने की वजह से एक तो कहीं भाड़े की गाड़ी नहीं मिल रही थी। ऊपर से अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिलने की वजह से उनका बच्चा व्यवस्था की भेंट चढ़ गया। 
सदर अस्पताल में मृत बच्चे के साथ बैठे उसके परिजनों को स्थानीय लोगों की मदद से उसके गांव यानि अरवल जिला के शाहपुर भेज दिया गया है। जिले के डीएम का कहना है कि उनके संज्ञान में ये जानकारी आई है। डीएम के मुताबिक मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।