लॉकडाउन में जिंदा रहने के लिए जानवरों का अनाज खा रहे हैं लोग, खरपतवार की रोटी बनाकर भर रहे बच्चों का पेट

कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन में कुछ ऐसी खबरें और तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो दिलों को झकझोर कर रख देने वाली हैं। जहां गरीब-मजदूर परिवारों को दो वक्त की रोटी तक नसीब नहीं हो पा रही है। ऐसी एक दुखद तस्वीर मध्य प्रदेश से सामने आई है। जहां एक बजुर्ग महिला पशुओं के लिए खिलाए जाने वाले समाई-कोदो (एक प्रकार का अनाज) के आटे से बनी रोटी खाने को मजबूर हैं।
दरअसल, यह भयावह मंजर छिदंवाड़ा जिले का है। जहां करीब 50 ऐसे परिवार हैं जिनके घरों का राशन खत्म हो गया है। सारी जमा पूंजी भी समाप्त हो गई। ऐसे में कोई दुकानदार उनको उधार राशन देने को तैयार नहीं है। आखिर में इन परिवारों ने खुद को जिंदा रखने के लिए जानवरों के लिए दिया जाने वाला भोजन यानि एक तरह की खरपतवार की रोटी बनाकर खाने को मजबूर हैं। फोटो में दिखाई दे रही यह बुजुर्ग महिला श्यामबाई आदिवासी है जो इस तरह खाना तैयार कर रही है। 
इस मामले पर तहसीलदार एमपी उदैनिया का कहना है कि जल्द ही इनके लिए राशन का इंतजाम किया जाएगा। यह तस्वीर मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की है। जहां महिलाएं एक तरह के खरपतवार कहे जाने वाले कोदी वा समई के आटे की रोटी बनाकर बच्चों का पेट भर रहे हैं। यह लोग डेली कमाकर खाने वाले हैं। लेकिन लॉकडाउन होने से मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इन परिवार का गुजर बसर करना मुश्किल होते दिख रहा है।