लॉकडाउन में अहमदाबाद से लौटा, "कभी पैदल चला तो कभी ट्रक में बैठकर आया"

लॉक डाउन में हर कोई अपने परिवार के साथ रहने की चाह रख रहा है। कोई वाहनों से घर पहुंच रहा है तो कोई पैदल ही। शहरों में मजदूरी कर रहे लोगों की स्थिति सबसे अलग है। काम-धंधा छूट जाने से वे किसी भी तरह घर पहुंच जाना चाहते हैं। सोमवार को शहर में सूफी साहब की दरगाह के पास आए एक युवक की भी ऐसी ही कहानी है।
अहमदाबाद से आए युवक से यहां बैठे पुलिसकर्मियों ने पूछताछ की तो पता चला कि वह कहीं पैदल तो कहीं वाहनों से सफर करता यहां तक पहुंचा है। पाली से पैदल ही सफर किया है। युवक ने बताया कि वह कमाने के लिए अहमदाबाद गया था। काम-धंधा बंद हो जाने से 28 मार्च की रात को 3 बजे अहमदाबाद से रवाना हो गया। किसर तरह पाली पहुंचा और 29 मार्च की रात को पाली से पैदल ही चल पड़ा। जोधपुर होते हुए वह यहां तक आ पहुंचा। उसे अपने गांव गोरेरा जाना था।

थके-हारे युवक को देखकर पुलिसकर्मियों ने चाय-नाश्ता करवाया। खाना खिलाया और उसके परिवार से संपर्क किया। साथ ही उसे ले जाने के लिए किसी को भेजने की हिदायत दी। युवक सदी-खांसी से पीडि़त दिखा। इस पर मेडिकल टीम को सूचना दी गई। इसके बाद मौके पर पहुंची मेडिकल टीम ने उसकी स्क्रीनिंग की एवं कोरोना वायरस जैसे लक्षण नहीं दिखने पर उसे दवाई देकर आराम की सलाह दी।

गोरेरा गांव निवासी 35 वर्षीय युवक कोजाराम पुत्र दुलाराम ने बताया कि वह दो महीने पहले ही अहमदाबाद के आश्रम स्थित एक सीमेंट फैक्ट्री में कमाने गया था। लॉक डाउन होने पर भी वह रूका रहा। खाने-पीने की दिक्कत हुई तो वह अपने साथियों के साथ वहां से निकल पड़ा। किसी से लिफ्ट लेकर पालनपुर के रास्ते पाली पहुंचे। वहां से उसके सार्थी, जो अन्य जिलों के थे वे अपनी राह चले गए। युवक ने बताया कि घर में उसकी मां, भाई, पत्नी व दो बच्चे हंै।
Loading...