लॉकडाउन में सामने आई रोंगटे खड़े करने वाली खबर, मरने से पहले मां नहीं देख पाई अपने ही बेटी का चेहरा...

नियम-कायदे अमीर-गरीब और खास-आम सबके लिए बराबर होने चाहिए, लेकिन यहां अफसरों की हठधर्मिता से मां-बाप अपनी बेटी से आखिरी पलों में भी नहीं मिल सके। 28 साल की बेटी बीमार थी। उसने फोन लगाकर कहा-पापा! अब हम नहीं बचेंगे..आप मां को लेकर आ जाओ..मुझे उनका चेहरा देखना है। चैन से मर सकूंगी। इसके बाद पिता रोते हुए अफसरों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन परमिशन नहीं मिली।
आखिरकार बेटी की मौत हो गई और वीडियो कॉल के जरिये बेटी का आखिरी बार चेहरा देखना पड़ा। जबकि ऐसे मामलों में चेकअप और पड़ताल के बाद परमिशन दी जा सकती थी। पिता का दर्द था कि जिन अफसरों के वो चक्कर काटता रहा, उन्होंने ही एक मंत्री की सिफारिश पर 8 बसों में सैकड़ों लोगों को भरकर दूसरे जिले में जाने दिया था। आखिरी उसके साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया गया? वे किसी से सिफारिश नहीं कर पाया। रांची की नामकुम हाईटेंशन कॉलोनी में रहने वाले जितेंद्र कुमार नेशनल प्रिंटिंग प्रेस में वेब सेक्शन के इंचार्ज हैं। 

उनकी बेटी रानी कुछ समय से बीमार थी। उसकी ससुराल बिहार के नवादा में हैं। बुधवार रात जब उसकी तबीयत बिगड़ी, तो उसने पिता को फोन लगा और कहा कि अब वो नहीं बचेगी। इसलिए मां को आखिरी बार देखना चाहती है। रानी की मां सुलेखा ने बताया कि उन्होंने अफसरों से अनुमति मांगी, लेकिन किसी ने उनकी एक बात नहीं सुनी। इसके बाद रानी का निधन हो गया। रानी की 4 साल की बेटी सुहानी ननिहाल में रहती है। वो मां से मिलने फूट-फूटकर रोती रही। आखिरकार अनुमति नहीं मिलने पर सबने वीडियो कॉल के जरिये रानी के अंतिम दर्शन किए।
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