बेबस बेटियों ने निभाया एक बेटे का फर्ज, मुंडन कराके पिता का किए पिंडदान!

शुक्रवार रात पिता की मृत्यु होने और उनकी अर्थी को कंधा देकर अंतिम संस्कार कराने वाली बेटियों ने सोमवार को पिता का पिंडदान किया। मुंडन संस्कार के साथ सभी वो रस्में निभाईं जिसे एक बेटा ही निभाता है। बेटियों ने समाज को संदेश भी दे दिया कि जिस रीति-रिवाज को आपने बेटों के नाम किया था, उसे करने में हम भी पीछे नहीं हैं।

चाय की दुकान थी 
नुमाइश मैदान के सामने चाय की दुकान चलाने वाले 42 वर्षीय संजय गुप्ता की इलाज के अभाव में मौत हो गई थी।  वे नगला कलार में किराये के मकान में रह रहे थे। पिता की मृत्यु के बाद विवाहित बेटी काजल के अलावा राधा, मोना, हिमांशी व ज्योति ने अर्थी को कंधा देते हुए अंतिम संस्कार कराया था। हालांकि मुखाग्नि संजय के छोटे भाई नरेंद्र ने दी थी। सोमवार को इन बेटियों ने वो सारे फर्ज निभाए जिन्हें एक बेटा ही पूरा कराता है। बेटी राधा, मोना, हिमांशी व ज्योति ने मिलकर पिता संजय गुप्ता का पिंडदान व अपना मुंडन संस्कार कराया। इतना ही नहीं उन्होंने ङ्क्षहदू धर्म के अनुसार रीति-रिवाजों को भी पूरा किया। इस दृश्य को जिसने  भी देखा आंखें नम हो गईं। 

पापा ने कहा था,  बेटे से कम नहीं बेटियां  

बकौल बेटियां, पापा हमेशा कहते थे कि आजकल बेटा-बेटियों में कोई अंतर नहीं है। बेटा जो करता है, वह सारे काम बेटियां भी कर सकती हैं। इन बेटियों ने पापा की कही प्रत्येक बात को सच साबित किया और पिंडदान व मुंडन संस्कार कराया। इस दौरान उनकी मां अंजू गुप्ता व स्वजन भी मौजूद रहे। जिला प्रशासन की ओर से संजय गुप्ता के परिवार को कांशीराम आवासीय उपलब्ध कराया गया है। स्वजनों को एसीएम प्रथम ने पहुंचकर आवंटित आवास की चाबी सौंप दी। स्वजनों का कहना है कि तेरहवीं संस्कार के बाद ही इस आवास में शिफ्ट होंगे। 

अवस्थी ज्योतिष संस्थान के आदित्य नारायण अवस्थी का कहना है कि समाज में भ्रांतियां है कि केवल पुरुष ही मुखाग्नि देते हैं और पिंडदान कर सकते हैं। अंतिम संस्कार व श्राद्धकर्म की व्यवस्था के तहत प्राचीन वैदिक ग्रंथ गरुण पुराण में पुत्र या पुरुष सदस्य के अभाव में कौन-कौन सदस्य मुखाग्नि व पिंडदान कर सकते हैं का उल्लेख मिलता है। बेटियां भी पिता की मृत्यु पर पिंडदान कर सकती हैं, लेकिन मुंडन संस्कार धर्म के अनुसार सही नहीं हैं।