लॉकडाउन में इन युवकों ने घर लौटने की जगह तरबूज बेचकर मिटाई अपनी भूख

कोरोना महामारी को लेकर पूरे देश में 22 मार्च को लॉक डाउन की घोषणा कर दी गई. इस घोषणा के बाद से ही लगातार लोगों का अपने अपने घर वापसी का सिलसिला जारी है. लोग अपने अपने सवारी से या पैदल ही कई सौ किलोमीटर की दूरी तय घर पहुंचने के लिए लगातार जद्दोजहद करते रहे. इस क्रम में कई लोग अपने घर पहुंचने से पहले क्वारेंटाइन सेंटर में पहुंच गए. 
लेकिन गोपालगंज में झारखंड के चार ऐसे युवक और युवतियों ने इस वक्त में समझदारी का परिचय दिया और वे घर वापस लौटने के बजाय खुद का बिजनेस शुरू कर अपना खर्च निकालने में जुट गए. ये लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ख्याल रख रहे हैं. झारखंड के देवघर के रहने वाले सफाउल और जेबा अपने अन्य दो साथियों के साथ गोपालगंज में एक होटल में मजदूरी करते थे. चारों साथी लॉक डाउन के दौरान होटल के बंद होने के बाद बेरोजगार हो गए. उनके पास न खाने के लिए पैसे थे. और न ही घर वापस जाने के लिए कोई साधन.

इन युवकों ने 40 रुपये प्रतिदिन में एक ठेला किराये पर लिया और 30 रुपये प्रतिदिन की दर से उन्होंने तराजू लिया. उनके पास थोड़े पैसे थे तो उन्होंने उन पैसों से तरबूज ख़रीदा और बेचने निकल पड़े. चारों मजदूरों ने दो शिफ्ट में तरबूज का ठेला लेकर शहर के मोहल्ले में जाकर उसकी बिक्री शुरू कर दी. 25 वर्षीय सफाउल के मुताबिक वे देवघर के रहने वाले है. लॉक डाउन के बाद अपने घर नहीं जा पाए. उनके सामने खाने की किल्लत होने लगी थी. उन्होंने किराया पर ठेला और तराजू लिया. 

तरबूज की खरीद बिक्री शुरू कर दी है. सफाउल के साथ काम करने वाली जेबा के मुताबिक वे तरबूज की बिक्री कर थोड़ा बहुत खर्च निकाल ले रही है. इससे उनका खर्च नहीं निकल पा रहा है, लेकिन उन्हें भूखे नहीं सोना पड़ता है. वे भी घर जाना चाहती है, लेकिन उनके पास कोई चारा नहीं है. यही वजह है कि वे तरबूज की बिक्री कर अपनी जिन्दगी की गाड़ी चला रहे हैं.