लॉकडाउन में बाहर से आए पिता व दो पुत्र खुद ही पहुंचे जांच कराने अस्पताल

शिवपुरी शहर के कमलागंज में रहने वाले सुरेश राठौर अपने दो पुत्रों के साथ इंदौर में रोजगार करते थे, लेकिन लॉकडाउन होने के बाद उनका राशन-पानी खत्म और जेब खाली हो जाने से वे तीनों रविवार की सुबह ट्रक से गुना नाके पर उतर गए। चूंकि प्रदेश में इंदौर सबसे अधिक संवेदनशील है, इसलिए यह तीनों अपने घर न जाते हुए जिला अस्पताल पहुंचे। 
मीडिया की मदद से इन तीनों का अस्पताल में सैंपल लिया गया तथा जब यह लोग घर पहुंचे तो वहां भी स्वास्थ्य टीम पहुंच गई। स्वास्थ्य दल को राठौर के घर आते देख आस-पड़ौस के लोगों की ऐसी भीड़ इक_ा हो गई, मानों आतंकवादी आए हों। इंदौर से लौटे सुरेश के बेटे पवन का कहना है कि यदि हमारे पास पैसा व राशन की दिक्कत नहीं होती तो हम यहां लौट कर नहीं आते और लोगों का ऐसा व्यवहार नहीं झेलते।

कमलागंज निवासी सुरेश राठौर इंदौर में फल व सब्जी का ठेला लगाते थे, जबकि उनका बेटा पवन राठौर इंदौर की सिटी बस में कंडेक्टर तथा छोटा बेटा करन अपने पिता के ठेला कारोबार में मदद करता था। तीनों पिता-पुत्र इंदौर में ही किराए का कमरा लेकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे थे, लेकिन कोरोना संक्रमण का प्रदेश में सबसे बड़ा हॉट स्पॉट बने इंदौर में जब सब कुछ ठप हो गया तो इन पिता-पुत्रों को खाने के लिए परेशान होना पड़ गया, तथा जमा पूंजी भी खत्म हो गई तो फिर यह तीनों लोग इंदौर से ट्रक में बैठकर शिवपुरी आए तथा गुना नाके पर उतर गए।

तीनों पिता-पुत्र गुना नाके पर ट्रक से उतरने के बाद अपने घर न जाते हुए जिला अस्पताल पहुंचे। इसके लिए उन्होंने अपने एक साथी को फोन लगाकर पूछा कि हमारी सैंपल जांच कहां होगी?। जब यह जानकारी पत्रिका को मिली तो उनकी जांच कराए जाने के लिए सीएमएचओ डॉ. एएल शर्मा को मोबाइल लगाया, लेकिन शर्मा ने फोन रिसीव नहीं किया। चूंकि सैंपल जिला अस्पताल में लिए जा रहे हैं, इसलिए सिविल सर्जन डॉ. पीके खरे से संपर्क किया। डॉ. खरे ने तीनों के सैंपल करवाए तथा तीनों को खाने के पैकेट भी उपलब्ध कराए।