लॉकडाउन : सात घंटे भूखे प्यासे लाइन में खड़े रहने पर भी नम्बर नहीं आ पा रहा है

कोरोना महामारी व लॉकडाउन के दौरान रसद विभाग की ओर से उचित मूल्य की दुकानों से राशन सामग्री का वितरण जारी है। राशन सामग्री को लेने के लिए दुकान पर जितने पंजीकृत उपभोक्ता है राशन लेने एक साथ पहुंच रहे है। इसके चलते सोशल डिसटेंसिंग की पालना भी नहीं हो पा रही। राशन डीलर उपभोक्ताओं को समझा रहे है घंटों कतार में खड़े नहीं रहे, सभी को गेहूं का वितरण किया जाएगा। बावजूद उपभोक्ता राशन लेने के लिए घंटों कतार में खड़े रह रहे है। 
बुधवार को प्रेमनगर तृतीय स्थित राशन की दुकान के सुबह 7 बजे खुलते ही लम्बी कतारें लग गई। यहां पर महिलाओं की कतार करीब आधे किलोमीटर तक लम्बी लग गई।कतार में सात घंटे खड़े रहने पर भी नम्बर नहीं आ रहा था। प्रेमनगर तृतीय स्थित राशन डीलर के यहां महिलाओं व पुरूषों की अलग अलग कतारें सुबह 7 बजे दुकान खुलते ही लग गई। धीरे धीरे कतारे देखते ही देखते आधे किलोमीटर लम्बी हो गई। कतारों में सोशल डिसटेंसिंग की पालना उपभोक्ता नहीं कर रहे थे। 

सूचना पर उद्योगनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कतार में खड़े लोगों में सोशल डिसटेंसिंग की पालना कराई और आधे किलोमीटर तक ही गोले बनवाए गए। राशन डीलर संतोष अग्रवाल ने बताया कि यहां दोनों दुकानों पर करीब ४ हजार उपभोक्ता है। दुकान खुलते ही सभी उपभोक्ता कतार में खड़े हो जाते है। उन्हें समझाया सभी को राशन मिलेगा एक साथ नहीं आए, लेकिन कोई उनकी नहीं मान रहा। उन्होंने बताया कि मंगलार को सुबह 7 बजे से रात्रि में 9.30 बजे तक गेहूं का वितरण किया गया। पूरे दिन ऐसे ही कतार लगी रही। आज भी दुकान खुलते ही लम्बी कतारे लग गई।

प्रेमनगर राशन की दुकान के बाहर कतार में लगी महिलाओं ने बताया कि सुबह 7 बजे आ गए थे। अभी दोपहर के २ बज गए अभी तक नम्बर नहीं आया। महिलाओं ने बताया कि सुबह चाय पीकर घर से निकले थे, अभी तक खाना भी नहीं खाया है। महिलाओं ने बताया कि क्या पता कल गेहूं मिले या नहीं एसलिए घंटों कतार में खड़े होना पड़ रहा है। कुछ महिलाएं लगातर खड़े रहने से थक हारकर गोलों में थैले कट्टे रखकर दुकानों के नीचे छाया में बैठी हुई थी।
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