रात में अपने बच्चों को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं!

कोरोना से लोगों को बचाने के लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग की कवायद जारी है। इसी बीच अब एईएस (चमकी बुखार) ने भी जिले में दस्तक दे दी है। अब तक करीब आधा दर्जन एईएस के मामले जिले में सामने आ चुके हैं। वहीं, ऐसे मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है। स्वास्थ्य विभाग सहित जिला प्रशासन के लिए इसकी रोकथाम एक बड़ी चुनौती है। एईएस व जेई के इलाज के लिए सदर अस्पताल के पीआइसीयू (पीकू वार्ड) में विशेष व्यवस्था की गई है। 
शनिवार को इस वार्ड में दो संदिग्ध मरीज पहुंचे। उनकी जांच व उपचार जारी है। जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक व सिविल सर्जन डॉ. रिजवान अहमद स्वयं स्थिति की लगातार मॉनीटरिग कर रहे हैं। बार-बार यह चेतावनी दी जा रही है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर जिले में जागरूकता अभियान चला रखा है। प्रतिदिन प्रत्येक प्रखंड में माइकिग भी की जा रही है। 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व आशा के माध्यम से घर-घर जाकर इस बात की पड़ताल की जा रही है कि कहीं कोई बच्चा बीमार तो नहीं है। सर्वे से संबंधित प्रतिवेदन भी प्रतिदिन जमा कराए जा रहे हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि चमकी बुखार का लक्षण सामने आते ही तुरंत निकट के स्वास्थ्य केंद्र पर बच्चे को ले जाएं। यह बीमारी ससमय इलाज से ठीक हो सकती है। अत्यधिक गर्मी एवं नमी के मौसम में यह बीमारी फैलती है। आमतौर पर एक से 15 वर्ष तक के बच्चे इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होते हैं।