लॉकडाउन : पांच दिनों तक भूखे पेट पैदल चलकर राजस्थान से पहुंचे जौनपुर!

नगर के जेसिज चौराहे पर लगभग 10 बजे चार युवक हाथों में बोरी व बैग लिए पैदल ही सिपाह की ओर बड़ी तेजी से जा रहे थे। उन्हें रोकने व चेक करने के लिए चौराहे पर कोई नहीं था। चेहरो को गमछे व मास्क से ढ़के हुए चारों को हिन्दुस्तान ने रोका तो वे घबरा गए। डबडबायी आंखो से आंखे मिलाकर चारों ने कहा कि राजस्थान से किसी तरह पैदल व बीच बीच में मिले वाहन से यहा तक पहुंचा हूं। जाने दिजिए हम लोगों को बक्सर तक ऐसे ही जाना है। 
बहुत कहने पर चारों बैठ गए और रास्ते में आयी दुश्वारियों के बारे जिक्र किया। चंदन, चंदन व अजीत ने बताया कि वह बक्सर जिले के रहने वाले है। राजन गाजीपुर के भदौरा का निवासी है। चारों एक साथ 15 मार्च को घर से कुछ पैसा लेकर राजस्थान भिवाड़ी में एक प्लाई की कम्पनी में काम करने के लिए गए थे। पांच दिन ही काम किए थे की लाकडाउन हो गया। कुछ दिन बिताने के बाद लगा कि अब जिंदा नहीं रह पाएगें तो वहा से 27 को सुबह पैदल ही हम चारों निकल दिए। 90 किलोमीटर पैदल चलकर पलवल पहुंचे। वहा से ट्रक में बैठकर मथुरा आए। 

मथुरा से आगरा आधा सफर पैदल व आधा वाहन से तय किया गया। आगरा से मिले एक वाहन में किसी तरह बैठकर कानपुर आए। कानपुर से पैदल चलते चलते जौनपुर हम लोग पहुंचे है। सुबह से ही इलहाबाद से चले है। रास्ते में एक एम्बुलेंस वाला मिला। जिसने आठ संतरा दिया। वह भी छिल्ली में ही है। खाने को कुछ नहीं मिला। यही बोतल का पानी पी पीकर सफर तय कर रहे है। दो लीटर पानी की बोतल 35 रुपए में खरीदा गया। अब इतना भी पैसा नहीं है कि कुछ खरीदकर खा सके। 135 रुपया हम चारों के पास बचा है।
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