लॉकडाउन में पैदल चलकर जा रही यही गर्भवती महिला, लोगों ने रोककर किया मदद...

लॉकडाउन के बीच एक गर्भवती महिला अपने पति और दो छोटी बेटियों के साथ नागपुर से जबलपुर पैदल आने को मजबूर हो गई। रास्ते में उसकी किसी ने मदद नहीं की। जबलपुर आने पर उसे प्रसव पीड़ा हुई। इसकी जानकारी किसी ने कलेक्टर भरत यादव को दी। उन्होंने मदद के लिए गोरखपुर तहसीलदार प्रदीप मिश्रा को अंधमूक बायपास चौराहा भेजा। मिश्रा ने महिला को मेडिकल में भर्ती कराया। 22 अप्रैल को महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। शुक्रवार को पूरे परिवार को विशेष वाहन से उनके निवास स्थान ग्वालियर भेजा गया।
राजेंद्र बघेल मूलत: ग्वालियर के रहने वाले हैं। वे नागपुर में बेलदारी करते हैं। उन्होंने बताया कि एक महीने से उनके पास कोई काम नहीं था। नागपुर में स्थानीय शासन से मदद मांगी, लेकिन उसे कोई सहारा नहीं मिला। ग्वालियर जाने की परमीशन भी नहीं दी गई। राजेंद्र ने बताया कि तब उन्होंने पैदल ही ग्वालियर जाने की तैयारी की। 19 अप्रैल को बर्तन एवं सूखा अनाज लेकर वह परिवार सहित निकले।
इस बीच पूरे रास्ते में लोगों से मदद मांगी। लेकिन, कोई सहारा देने तैयार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि दिन में एक बार खाना बनाकर फिर पैदल चलते रहे। तीन दिन में वह जबलपुर पहुंचे। जबलपुर से करीब 20 किमी दूर एक ट्रक मिला। उस पर बैठकर अंधमूक बायपास चौराहा तक पहुंचे। ड्राइवर ने आगे जांच होने की बात कहकर यही रोक दिया। इस बीच उसकी पत्नी को असहनीय पीड़ा हुई। तभी इसकी सूचना आशीष ठाकुर ने कलेक्टर को दी।
तहसीलदार मिश्रा वाहन में राजेंद्र की पत्नी नीतू, उसकी छह एवं तीन वर्षीय पुत्री कामिनी और कृष्णा को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां इलाज के दौरान पुत्र को जन्म दिया। तहसीलदार प्रदीप मिश्रा ने बताया कि शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मंजू एवं सुधा और मुकेश राय को बुलाकर गोद भराई रस्म पूरी की। उन्हें लड्डू एवं नकद राशि देकर विशेष वाहन से ग्वालियर रवाना किया गया।