लॉक डाउन में घर के अंदर ही लिए गए सात फेरे...

लॉक डाउन पर सोमवार की दोपहर प्रशासनिक अनुमति के बाद सोशल डिस्टेंस नियम को फॉलो करते हुए एक विवाह हुआ। जिसमें न बराती थे, न बैंड था। सिर्फ कुछ लोगों की मौजूदगी में घर के एक कमरे में विवाह की रस्में निभाते हुए, वर-वधू ने एक दूसरे को वरमाला डाली। दमोह की जटाशंकर कॉलोनी स्थित वधू के घर पर वैवाहिक रस्में पूरी की गईं। वर भी दमोह के चौधरी मंदिर निवासी हैं, जिससे इन दोनों परिवारों को लॉक डाउन में आने-जाने में भी ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।
लॉक डाउन में शहर का ऐसा पहला विवाह हुआ, जिसमें घर के दरवाजे बंद थे। घर के अंदर वर व वधू पक्ष के चुनिंदा लोगों की मौजूदगी रही। यहां तक घनिष्ठ पड़ोसियों को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। घर के अंदर बगैर हो हल्ला के प्रशासनिक दायरे में विवाह की रस्में चल रहीं थीं। यह विवाह पं. रामचंद्र जैन द्वारा जैन धर्म की परंपराओं के अनुसार संपन्न कराया। चौधरी मंदिर निवासी स्वप्निल जैन की सगाई जटाशंकर कॉलोनी स्थित आकांक्षा जैन से तीन माह पहले हो चुकी थी। 

उसी दौरान 6 अप्रैल का विवाह मुर्हूत निकलने पर धूमधाम से विवाह करने के लिए बारात हाल, बैंडबाजे, घुड़बग्गी, आतिशबाजी सहित सभी बुकिंग हो चुकी थीं। वर-वधू के गृह नक्षत्रों के अनुसार शुद्ध लगन का विवाह 6 अप्रैल का बैठ रहा था, इसके बाद अगले 3 साल तक इनके विवाह का मुर्हूत नहीं था। जिस पर वर के पिता नरेंद्र कुमार जैन व वधू के पिता विनोद कुमार जैन ने लॉक डाउन का पालन करते हुए सभी बुकिंग तो निरस्त कर दीं। लेकिन अगले 3 साल इंतजार करना ठीक नहीं समझा। 

इसलिए एसडीएम रविंद्र चौकसे के पास पहुंचे। जहां से सोशल डिस्टेंस के तहत विवाह करने की अनुमति भी मिल गई। वर स्वप्निल जैन ने कहा कि महामारी के दौर में प्रशासनिक नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए विवाह कराने की वाध्यता रखी गई थी। 3 साल के इंतजार से अच्छा प्रशासनिक नियमों का पालन करते हुए हमें विवाह संपन्न कराना था, जिसमें हम सफल हुए हैं और कोरोना से सुरक्षित भी हैं।