"हर रोज बुला रही मां, कोई हमें पहुंचा दे घर" लॉकडाउन में फंसी ये दो लड़कियां लगा रही गुहार

कोटा शहर के केबलनगर आलनिया स्थित कॅरियर प्वाइंट विश्वविद्यालय से बीएससी (कृषि ) द्वितीय वर्ष की दो की दो छात्राएं लॉकडाउन के चलते अपने घर नहीं जा पा रही हैंं। हर रोज अपने घर पहुंचने की आस लगाए बैठी रहती हैं। जैसे ही कोई इनके दरवाजे पर पहुंचता है तो दौड़कर उनको अपना दुखड़ा सुनाती है और यही कहती है कि कोई उन्हें घर पहुंचा दे।
वे यहां एक पल भी नहीं रहना चाहती। इतना कहते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक आते हैं। यह पीड़ा है मूलत: मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के घामेड़ी गांव की निवासी छात्रा कृष्णा राठौड़ का। उसने पत्रिका को बताया कि वे हेल्पलाइन नंबर पर भी कम से कम आधा दर्जन बार घर जाने की गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। घर में रखा राशन व पैसा भी खत्म होने लगा है। 

कृष्णा ने बताया कि एक माह से उसकी मकान मालकिन मोहनी बाई उसकी व सहेली नितेश की मदद कर रही हैं तथा उन्हें हर रोज राशन व अन्य सामान देकर दिलासा दे रही है। कृष्णा ने बताया कि पिता का साया उठने के बाद उसका भाई घर चला रहा है तथा उसे पढ़ा रहा है। वह कहती है कि लॉकडाउन के बाद मां हर रोज गांव बुला रही है कि कैसे भी एक बार घर आ जाओ। जैसेही कोटा में कोरोना की खबर परिवार वालों के पास पहुंचती है तो वे चिंतित हो जाते हैं। कई बार वीडियो कॉलिंग भी करती हूं तो मां के आंसू छलक जाते हैं। 

उसकी सहपाठी नितेश बूंदी जिले के नैनवां कस्बे से 5 किलोमीटर दूर रजलावता गांव निवासी है। वह केवल अपनी सहपाठी को अकेला नहीं छोडऩा चाहती। इसीलिए उसके साथ रह रही है। उसका कहना है कि जब तक कृष्णा उसके घर नहीं पहुंच जाती तब तक वह उसी के साथ रहेगी। उसके माता- पिता भी हर रोज उसे घर बुला रहे हैं। दोनों छात्राओं ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें घर पहुंचाया जाए।