बेटी ने लिया जन्म, घर से दूर पुलिस पिता ने कहा, "लाॅकडाउन के बाद ही बेटी को उठाऊंगा गोद में"

कोरोना संक्रमण में देश की खातिर कई कोरोना वॉरियर्स अपनी खुशियों को ताक पर रख रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कोरोना संक्रमित जिले इटावा में तैनात एक पुलिस कर्मी उन्हीं में से एक हैं। वह दो अप्रैल को घर में जन्मी अपनी बेटी का अभी तक स्पर्श नहीं कर पाए हैं। बस अपने मोबाइल पर उसकी एक तस्वीर देखते हैं और खुद को यह कहकर समझा लेते हैं कि जल्द लाॅकडाउन खत्म होगा और वह बेटी को गोद में उठाएंगे।
इटावा जिले में कोतवाली इलाके में नौरंगाबाद चैकी पर एटा जिले के निवासी सिपाही रमाकांत की तैनाती है। रमाकांत की पत्नी परिवार के साथ रहती है। पत्नी ने बीते 2 अप्रैल को बेटी को जन्म दिया है। इस खुशी के पल में रमाकांत को पत्नी के साथ रहना था। पत्नी को भी अपने पति की जरुरत थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। कोरोना संक्रमण के बीच लाॅकडाउन के कारण रमाकांत ने अपनी खुशी पर अंकुश लगाते हुए फर्ज निभाना ज्यादा जरूरी समझा। 
सिपाही के परिवारी जनों ने जब बताया कि उनके घर नन्ही परी आई तो सिपाही की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार ने बेटी का नाम हिमांशी रखा है। सिपाही बीते 12 दिनों से अपनी नवजात बेटी की तस्वीर देखकर अपना मन बहला रहा है। सिपाही ने कहा कि अब 3 मई का बेसब्री से इंतजार है। लाॅकडाउन हटने के बाद बेटी को गोद में उठाऊंगा। परिवार ने रमाकांत को मासूम बेटी की पहली तस्वीर भेजी है। जब समय मिलता है तो वह उसे निहार लेते हैं। तस्वीर को छूकर बेटी के अपने करीब होने का एहसास करते हैं।
रमाकांत ने पत्नी से वादा किया था कि जब लाॅकडाउन खत्म होगा तो जरूर घर आएंगे। उन्होंने कहा कि अब तीन मई के बाद घर जाकर बिटिया को गले लगाऊंगा। फिलहाल वे फोन पर ही बेटी व परिवार का हालचाल लेकर तीन मई आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कोरोना वायरस (कोविड-19) को मात देने के लिए प्रधानमंत्री ने लाॅकडाउन (दूसरा चरण) का ऐलान किया। इस वैश्विक बीमारी को हराने के लिए तमाम कोरोना वारियर्स भी सक्रिय हैं।