लॉकडाउन में भूख से तड़प रही मां के लिए बेटे ने किया चोरी, और फिर जज ने सुनाया ऐसा आदेश

दो वक्त की रोटी मुश्किल से जुटा पाने वाले लोगों के लिए लॉकडाउन कहर बनकर टूटा लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इससे कारगर उपाय भी कोई नहीं है। ऐसे कठिन समय में समाज के ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं जो गरीबों की मजबूरी समझ रहे हैं और उनकी तरफ मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को नालंदा जिले के बिहारशरीफ में प्रकाश में आया। एक नाबालिग को चोरी के आरोप में पुलिस ने जज के सामने पेश किया। जज को जब पता चला कि किशोर ने भूख से तड़प रही मां के लिए खाना जुटाने के लिए चोरी की तो उन्होंने उसे सजा की जगह राशन और कपड़ा दिया।
इस्लामपुर में रहने वाले नाबालिग को पुलिस ने किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र के कोर्ट में पेश किया था। उन्होंने किशोर को मुक्त कर दिया। साथ ही पदाधिकारियों को उसे हर संभव मदद करने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने का आदेश दिया। उन्होंने किशोर को खाने के लिए राशन और उसकी विक्षिप्त मां लिए कपड़े दिलाए। अपने आदेश में मिश्र ने इस्लामपुर के थानाध्यक्ष को किशोर को सुरक्षित उसके घर तक पहुंचाने और उसके संरक्षण व परीक्षण पर नजर रखने का निर्देश दिया। 
साथ ही प्रत्येक चार माह पर किशोर से संबंधित प्रगति रिपोर्ट जेजेबी (किशोर न्याय परिषद) को सौपने को कहा। जज ने इस्लामपुर बीडीओ को पत्र लिखकर किशोर को सरकारी योजनाओं का लाभ देने के निर्देश दिए। भोजन के लिए अनाज उपलब्ध हो इसके लिए राशन कार्ड, किशोर की मां को विधवा पेंशन, गृह निर्माण के लिए अनुदान राशि, समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने के लिए आधार कार्ड, आय प्रमाणपत्र, आवासीय प्रमाणपत्र, बैंक खाता खुलवाना, किशोर को कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ना जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है।
किशोर के पिता की मौत कुछ साल पहले हो चुकी है। पिता की मौत के बाद उसकी मां विक्षिप्त हो गई। मां की स्थिति ऐसी है कि दैनिक क्रिया-क्रम के लिए भी वह अपने बेटे पर निर्भर है। एक छोटा भाई भी है। परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी किशोर पर है। घर के नाम पर कच्ची मिट्टी की एक टूटी-फूटी फुसनुमा झोपड़ी है। सोने के लिए एक खाट तक नहीं है। मां-बेटा जमीन पर ही किसी तरह सोते हैं। खाने-पीने की घोर समस्या है।