पुलिस पर पत्थरबाजी करने वाला जावेद निकला कोरोना+ और अब पुलिसकर्मी हुए आइसोलेट

मध्य प्रदेश के इंदौर में शासकीय कर्मचारियों पर पत्थरबाजी और हमले के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जबलपुर जेल भेजे गए चार आरोपितों में से एक का टेस्ट कोरोना पॉजिटिव निकला है। आरोपित जावेद को जिला अस्पताल ले जाकर आइसोलेट कर दिया गया है। जावेद के कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद जेल में संक्रमण बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। साथ ही, इंदौर से इसे लाने वाले पुलिसकर्मियों पर भी संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इंदौर में पुलिस टीम पर हमला करने वाले आरोपितों को जबलपुर जेल ले जाया गया था, तभी से एक की तबीयत खराब थी, लेकिन सभी को अस्पताल में एडमिट कराया गया था। इसके बाद जब उनके सैंपल लिए गए तो इनमें एक आरोपित जावेद की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जबकि अन्य तीन की रिपोर्ट निगेटिव आई, और उन्हें जेल में शिफ्ट किया गया। जावेद में संक्रमण की पुष्टि के बाद जो पुलिसकर्मी उसे लेकर जबलपुर जेल गए थे, उन्हें क्वारंटाइन करने के लिए कहा गया है। इसी के साथ MP के जबलपुर में 10 कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। जबकि इसमें से 5 मरीज अब तक स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।

इंदौर पुलिस के अनुसार 7 अप्रैल की शाम को चंदन नगर थाना क्षेत्र में कुछ व्यक्ति एक सफेद रंग की मैजिक वैन क्रमांक एमपी 10T4559 में बैठे हुए थे। इन्हें थाना चंदन नगर में पदस्थ आरक्षक सुरेन्द्र अहाके और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने से मना किया गया। इसके साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि जावेद टाटपट्टी बाखल में डॉक्टर्स पर पत्थरबाजी करने वालों में भी शामिल थे।

लेकिन आरोपितों ने पुलिसकर्मियों की बात मानने के बजाए पुलिसवाले से बदसलूकी की और साथ ही पत्थरबाजी भी की। उपद्रवियों ने पुलिस के वाहन में भी तोड़फोड़ की। जिसके बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने चंदन नगर में हुई घटना पर कार्रवाई करते हुए 4 आरोपितों को रासुका (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जबलपुर जेल भेज दिया था। पुलिस पर पत्थरबाजी और बदसलूकी करने वालों में चंदन नगर के रहने वाले आरोपित सलीम उर्फ सल्लू (50) पुत्र लल्लू खान, जावेद (30) पुत्र नासिर खान, इमरान (24) पुत्र भुरू खान तथा समीर (22) पुत्र अनवर खान शामिल हैं।

कैदियों के कोरोना पॉजिटिव निकलने की इस खबर से सीख लेकर केंद्रीय जेल में जिस बैरक में कैदी को रखा गया था उसको सैनेटाइज किया जा रहा है और संपर्क में आने वाले अन्य कैदियों की जाँच भी की जा रही है। उधर घटना से सबक लेते हुए भोपाल सेंट्रल जेल में नए कैदियों की एंट्री पर भी रोक लगाते हुए नए कैदियों को अब पुरानी जेल में रखने का फैसला लिया गया है। ताकि जेल में बंद कैदियों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।