लॉकडाउन में "इस कलेजे के टुकड़े ने मां के लिए कलेजे पर पत्थर रख लिया"

मां का ख्याल आते ही मन श्रद्धा से भर उठता है, और यदि मां मिलने के गांव की सीमा पर खड़ी हो तो खुशी का ठिकाना नहीं रहे, किन्तु यहां वाकई मां गांव की सीमा पर खड़ी की खड़ी रह गई। बेटे ने मां को गांव में प्रवेश की स्वीकृति नहीं दी। ख्याल तो यही आएगा कि ऐसा दुष्ट बेटा भगवान किसी को ना दे पर यदि बेटा अपनी मां के बताए रास्ते पर चलकर देश सेवा के लिए यह त्याग कर रहा हो तो इसे दुष्टता नहीं सही मायने में मां के प्रति अपना कर्तव्य कहा जाएगा।
"मुझे भी बुरा लगा, जब मैंने अपनी माँ को वापस जाने के लिए कहा, लेकिन अपने गाँव के लोगों के लिए मुझे ऐसा करना ही था।" यह कहना था तेलंगाना के एक गाँव के सरपंच का, जब उसने पडोसी गांव से वापस आने वाली अपनी माता को लॉक डाउन नियम के चलते लौट जाने को कहा। साई गौड़ तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के गोइसाई पल्ली गाँव के सरपंच है। गाँव में 3 परिवार कोरोना संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया, जिसके बाद गाँव के सरपंच ने गाँव को सीलबंद करने का फैसला लिया। किसी भी व्यक्ति को गाँव में आने या बाहर जाने की अनुमति नहीं थी।

लॉक डाउन में गोइसाईपल्ली गाँव के सरपंच की माँ तुलसम्मा अपने रिश्तेदार से मिलने के लिए नजदीकी गाँव गयी हुई थी और जब वह वापस अपने गाँव लौटी, तब गाँव सीलबंद कर दिया गया था। चेकपोस्ट का संचालन करने वाले ग्रामीण स्तर के अधिकारियों ने महिला को बताया कि बाहरी लोगों को एहतियात के तौर पर अनुमति नहीं दी जा रही है। अधिकारियों ने सरपंच को उनके माँ के गांव लौटने की सूचना दी। साई गौड़ खुद चेकपोस्ट पर पहुंच गए लेकिन ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए गांव में किसी को भी अनुमति न देने के फैसले का सम्मान करते हुए सरपंच ने अपनी मां को अपने रिश्तेदार के घर वापस जाने के लिए कहा। 

उन्होंने कहा कि नियम सबके लिए बराबर हैं और प्रतिबंध हटने के बाद, वह घर लौट सकती है। यह सुनकर दु:ख भरे मन के साथ सरपंच की माँ वापस लौट गयी। साई गौड़ के मुताबिक जब उन्होंने अपनी माँ को वापस लौटने के लिए कहा, तब उन्हें बहुत बुरा लगा था। लेकिन सरपंच के तौर पर साई गौड़ के लिए उस वक्त अपनी माँ से ज्यादा जरूरी अपने गाँव वालों की सुरक्षा थी। गाँव में अपनी माँ को अनुमति न देने के सरपंच के फैसले की खुद गाँव वालों ने भी सराहना की। गाँव के निवासी सरपंच के इस फैसले से बहुत खुश नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि लॉक डाउन के चलते तेलंगाना के कई गाँवों के सरपंच बाहरी लोगों को गाँव में प्रवेश से रोकने के लिए स्वयं गाँव के प्रवेश स्थल पर खड़े, निगरानी कर रहे हैं। कुछ गांवों में लॉक डाउन का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है, तो कुछ गाँव बाहरी लोगों को गाँव से गुजरने की भी अनुमति नहीं दे रहे हैं। नलगोंडा जिले के मदनापुरम गाँव की 23 वर्षीय सरपंच वुदुथा अखिला यादव कभी लाठी पकड़ कर तो कभी खाली हाथ गाँव के प्रवेश स्थानों पर स्वयं खड़ी हो जाती हैं ताकि कोरोना पर काबू पाने के लिए किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश से रोका जा सके। 

यदि कोई व्यक्ति उस गाँव से केवल गुजरना भी चाहता हो, तब भी उसे प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इसी तरह के एक दूसरे उदाहरण में भद्राचलम जिले के भीमुनिगुडेम गांव की सरपंच मड़कम पोथम्मा भी अपने गाँव को कोरोना से बचाने के लिए प्रवेश स्थानों पर निगरानी कर रही हैं। गाँव के निवासी भी बारी बारी से प्रवेश स्थानों पर लगे बैरिकेड पर पहरा दे रहे हैं। तभी तो भारत एक जुट हो कर कोरोना से मुकाबले के लिए खड़ा हुआ दिखाई दे रहा है।