लॉकडाउन में गावों में लौट रहे हैं पुराने दिन, दाढ़ी बनवाने नाई के घर पहुंच रहे हैं लोग!

पटमदा के लोवाडीह गांव में मंगलवार को कुछ लोगों की दाढ़ी बना रहे सुरेश प्रमाणिक ने बताया कि अभी उनके घर पर ही सुबह से लोग आने लगते हैं। लॉकडाउन की वजह से युवा भी दाढ़ी या बाल कटवाने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता से ही बड़े भाई निर्मल प्रमाणिक और उन्हें लोवाडीह और खेडुआ आदि गांव मिले हैं। जिसे गां-घर (गांव-घर) बोलते हैं। यहां सप्ताह में एक दिन सेवा देनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि उनके पास जमीन नहीं है, बल्कि इसी पेशे से परिवार चलता है। 
इसी तरह दिघी, महुलबना, जोड़सा, आगुईडांगरा, तिलाबनी, कुईयानी, चुड़दा, लायलम, पहाड़पुर व बेलडीह समेत दर्जनों गांवों में रहने वाले नाई समाज के लोग आज भी यह परंपरा को जीवित रखे हुए हैं, जो इस वक्त लोगों की सेवा कर रहे हैं। पुराने जमाने में परंपरा थी कि हजामत बनाने के लिए लोग कहीं जाते नहीं थे, बल्कि गांव में ही आसपास के नाई आकर बच्चों से लेकर बूढ़ों के बाल-दाढ़ी बनाकर जाते थे। इसके लिए साल में एक बार प्रति व्यक्ति के हिसाब से धान मिलता था। 

हालांकि समय के साथ यह भी बदलाव आया कि लोग धान या चावल के बदले नगद राशि दे देते हैं। पटमदा के पूर्व पार्षद प्रदीप बेसरा ने बताया कि यहां सिर्फ ग्राहक और दुकानदार का ही रिश्ता नहीं, बल्कि सेवा देने वाले नाई का हर घर के साथ एक पारिवारिक रिश्ता बन जाता है और सुख-दुःख में एक-दूसरे की मदद भी करते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे पूर्वजों ने बहुत अच्छी व्यवस्था बनाई थी, जिसका फायदा लोगों को आज मिल रहा है। पहले तो विभिन्न गांवों में अन्य समुदाय के लोगों खासकर आदिवासियों की ओर से नाई जाति के लोगों को जमीन देकर बसाया जाता था, ताकि सभी को सुविधा मिल सके।